Parama Ekadashi 2026: परम एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा। मलमास या पुरुषोत्तम माह में रखा जाने वाला यह व्रत 3 साल में एक बार आता है। यही वजह है कि इस व्रत को बाकी एकादशी व्रतों से बेहद खास माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ ही भक्त कई प्रकार के उपाय भी करते हैं और दान-पुण्य करके भी भगवान विष्णु को प्रसन्न करते हैं। इसके साथ ही परम एकादशी के दिन अगर आप श्रीविष्णु अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् का पाठ करें तो आपकी सभी विपदाओं को दूर करके विष्णु भगवान आपकी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। नीचे आप संपूर्ण श्रीविष्णु अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् पढ़ सकते हैं।
श्री विष्णु अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्
ध्यानम्
वेत्तारं वेदपुरुषं यज्ञेशं यज्ञवाहकम्।
चक्रपाणिं गदापाणिं शंखपाणिं नरोत्तमम्॥1॥
दामोदरं दमोपेतं केशवं केशिसूदनम्।
वरेण्यं वरदं विष्णुं आश्रये वसुदेवजम्॥2॥
स्तोत्रम्
विष्णुर्लक्ष्मीपतिः कृष्णो वैकुण्ठो गरुडध्वजः।
परब्रह्म जगन्नाथो वासुदेवस्त्रिविक्रमः॥3॥
दैत्यान्तको मधुरिपुस्तार्क्ष्यवाहः सनातनः।
नारायणः पद्मनाभो हृषीकेशः सुधाप्रदः॥4॥
माधवः पुण्डरीकाक्षः स्थितिकर्ता परात्परः।
वनमाली यज्ञरूपः चक्रपाणिर्गदाधरः॥5॥
उपेन्द्रः केशवो हंसः समद्रमथनो हरिः।
गोविन्दो ब्रह्मजनकः कैटभासुरमर्दनः॥6॥
श्रीधरः कामजनकः तथा शेषश्चतुर्भुजः।
पाञ्चजन्यधरः श्रीमान् शार्ङ्गपाणिर्जनार्दनः॥7॥
पीतांबरधरो देवः सूर्यचन्द्रविलोचनः।
मत्स्यरूपः कूर्मतनुः क्रोडरूपो नृकेसरी॥8॥
वामनो भार्गवो रामो बली कल्की हयाननः।
विश्वंभरः शिशुमारः श्रीकरः कपिलो ध्रुवः॥9॥
दत्तात्रेयोऽच्युतोऽनन्तो मुकुन्दो दधिवामनः।
धन्वन्तरिः श्रीनिवासः प्रद्युम्नः पुरुषोत्तमः॥10॥
श्रीवत्सकौस्तुभधरो मुरारातिरधोक्षजः।
ऋषभो मोहिनीरूपधरः सङ्कर्षणः प्रभुः॥11॥
क्षीराब्धिशायी भूतात्माऽनिरुद्धो भक्तवत्सलः।
नरो गजेन्द्रवरदस्त्रिधामा भूतभावनः॥12॥
श्वेतद्वीपेषु वास्तव्यः सूर्यमण्डलमध्यगः।
सनकादिमुनिध्येयो भगवान् शङ्करप्रियः॥13॥
नीलकान्तो धराकान्तो वेदात्मा बादरायणः।
भागीरथीजन्मभूमिपादपद्मः सतां प्रभुः॥14॥
स्वभूर्विभुर्घनश्यामो जगत्कारणमव्ययम्।
बुद्धावतारः शान्तात्मा लीलामानुषविग्रहः॥15॥
दामोदरो विराड्रूपो भूतभव्यभवत्प्रभुः।
आदिदेवो देवदेवः प्रह्लादपरिपालकः॥16॥
इति नाम्नां शतं विष्णोः पुण्यमायुष्यवर्धनम्।
श्रीकीर्तिपुष्टिदं वंश्यं पठेद्भक्तियुतो नरः॥17॥
॥ इति श्रीविष्णोरष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
Vishnu Ashtottarshatnaam Strotram PDF Download
कैसे करें पाठ?
श्रीविष्णु अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् का पाठ आप एकादशी व्रत के दिन पूजा के दौरान ही कर सकते हैं। सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान के बाद दीपक पूजा स्थल पर आपको जलाना चाहिए इसके बाद गणेश जी की आरती और विष्णु मंत्रों का जप करने के बाद आप श्रीविष्णु अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् का पाठ कर सकते हैं। इस पाठ को संपन्न करने के बाद आपको भगवान विष्णु के चरणों में फूल अर्पित करने चाहिए और फिर अंत में आरती का पाठ करना चाहिए।
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