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हिंदू युवक की गिरफ्तारी पर बांग्लादेश में उबाल, भगवान राम की प्रतिमा बनाने का किया था ऐलान

 Written By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
 Published : Jul 18, 2026 12:36 pm IST,  Updated : Jul 18, 2026 12:36 pm IST

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हिंदू युवक हरिदास चंद्र तरणी दास की गिरफ्तारी के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन का नेतृत्व बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने किया। संगठन ने आरोप लगाया कि युवक को झूठे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया है और उसकी तत्काल रिहाई की मांग की।

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बांग्लादेश में हरिदास चंद्र तरणी दास की गिरफ्तारी के विरोध में जमकर प्रदर्शन हुआ है। Image Source : ANI

Highlights

  • ढाका में हिंदू युवक की गिरफ्तारी के विरोध में अल्पसंख्यक समुदाय ने बड़ा प्रदर्शन किया।
  • एकता परिषद ने झूठे मुकदमे का आरोप लगाकर तुरंत रिहाई की मांग उठाई।
  • भारत ने भी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कट्टरपंथियों पर कार्रवाई की मांग दोहराई।

ढाका: बांग्लादेश की राजधानी ढाका स्थित नेशनल प्रेस क्लब के बाहर शुक्रवार को हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदाय के लोगों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का आयोजन बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने किया। प्रदर्शनकारियों ने हिंदू युवक हरिदास चंद्र तरणी दास की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप में फंसाया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दास ने उत्तरी बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी क्षेत्र में भगवान राम की 81 फीट ऊंची प्रतिमा बनाने की पहल की थी। उनका आरोप है कि इसी के बाद उन्हें निशाना बनाया गया और उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

'किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं गिरफ्तारी'

एकता परिषद के महासचिव मणिंद्र कुमार नाथ ने कहा कि संगठन हरिदास चंद्र तरणी दास की गिरफ्तारी का कड़ा विरोध करता है। उन्होंने कहा, 'सरकार ने दो-तीन दिन पहले उन्हें इस आरोप में गिरफ्तार किया कि उन्होंने पलाशबाड़ी में भगवान राम की प्रतिमा बनवाई। हम इस तरह की गिरफ्तारी को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते।' मणिंद्र कुमार नाथ ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से बांग्लादेश में गैर-मुस्लिम समुदाय के लोगों पर लगातार हमले और उत्पीड़न की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने कहा,

'पिछले वर्ष पूरे बांग्लादेश में करीब 3,000 घटनाएं हुईं। इनमें 66 लोगों की हत्या कर दी गई और कई मंदिरों पर कट्टरपंथियों ने हमले किए। यह बेहद दुखद है और हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते।'

बता दें कि बांग्लादेश से हाल ही में एक हिंदू छात्र के साथ मारपीट की खबर भी सामने आई थी

भगवान राम की प्रतिमा का हुआ था अपमान

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हरिदास चंद्र तरणी दास को अदालत ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। उनका आरोप है कि मनी लॉन्ड्रिंग का मामला धार्मिक निर्माण कार्य को रोकने के उद्देश्य से लगाया गया है। यह मामला पिछले महीने गाइबांधा जिले में एक इस्लामी प्रदर्शन के दौरान भगवान राम की प्रतिमा के अपमान के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के कुछ समय बाद सामने आया है। एकता परिषद के वरिष्ठ नेता सुब्रत चौधरी ने प्रदर्शन के दौरान अंतरिम सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा,

'देश में आपसी सौहार्द का माहौल बना था। ऐसे में यह घटना किसने कराई और सरकार को शर्मिंदा करने की कोशिश किसने की, इसका पता लगाया जाना चाहिए। हम सरकार से इस मामले में तुरंत उचित कार्रवाई की मांग करते हैं।'

'बर्दाश्त नहीं होगा सरकारी तंत्र का दुरुपयोग'

सुब्रत चौधरी ने कहा कि हरिदास चंद्र तरणी दास को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने धर्म का अपमान करने वालों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई नहीं की और गिरफ्तार युवक को रिहा नहीं किया, तो पूरे बांग्लादेश में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर किसके निर्देश पर हरिदास चंद्र तरणी दास को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा,

'सरकार यह बताए कि इस कार्रवाई के पीछे कौन लोग हैं। चाहे वे कितने ही बड़े प्रशासनिक अधिकारी क्यों न हों, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।'

एकता परिषद के नेताओं ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय अब अपने धार्मिक अधिकारों को दबाने के लिए सरकारी तंत्र के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यदि गिरफ्तार युवक को जल्द रिहा नहीं किया गया तो बांग्लादेश का सनातन, बौद्ध और ईसाई समुदाय मिलकर देशव्यापी आंदोलन करेगा।

भारत भी इस मुद्दे पर जता चुका है चिंता

इस बीच, इस मुद्दे को लेकर भारत भी पहले अपनी चिंता जता चुका है। 23 जून को नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि बांग्लादेश में हिंदू देवी-देवताओं और उनकी प्रतिमाओं के कथित अपमान की खबरें चिंताजनक हैं, जिनके कारण विरोध प्रदर्शन हुए। उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश सरकार वहां सक्रिय कट्टरपंथी तत्वों पर प्रभावी कार्रवाई करेगी और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। (रिपोर्ट: ANI)

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