राहु ग्रह ज्योतिष शास्त्र में अपनी अलग अहमियत रखता है। मानव जीवन पर इसका असर भी गहरा होता है। अगर कुंडली में इसकी स्थिति शुभ है तो आपकी भौतिक इच्छाएं पूरी होती हैं और प्रसिद्धि आप जीवन में प्राप्त करते हैं। वहीं प्रतिकूल राहु भ्रम और दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि कुंडली के किन भावों में राहु को सबसे शुभ माना जाता है।
तृतीय भाव में राहु
कुंडली के तीसरे भाव को साहस और पराक्रम का कारक माना जाता है। इस भाव में बैठा राहु व्यक्ति को साहसी बनाता है। इसके साथ ही तकनीकी क्षेत्र, लेखन, पब्लिक डीलिंग, मीडिया आदि क्षेत्रों में ऐसे लोगों को सफलता मिलती है जिनके तीसरे भाव में राहु विराजमान होता है। इस भाव में राहु के होने से व्यक्ति को शारीरिक ऊर्जा भी प्राप्त होती है। ऐसे लोगों को जीवन में भाग्य का भी सहयोग प्राप्त हो सकता है।
षष्ठम भाव में राहु
कुंडली के छठे भाव में भी राहु बेहद शुभ होता है। इस भाव में अगर राहु हो तो व्यक्ति अपने शत्रुओं को पराजित कर सकता है। ऐसे लोग दृढ़-निश्चयी और शक्तिशाली होते हैं। इनको गूढ़ विषयों जैसे विज्ञान, ज्योतिष आदि के क्षेत्रों में सफलता प्राप्त हो सकती है। इसके साथ ही यहां बैठा राहु व्यक्ति को आर्थिक रूप से भी संपन्न बना सकता है। छठे भावों में राहु का होना भले ही थोड़े बहुत संघर्ष जीवन में पैदा करे लेकिन संघर्षों के बाद सफलता भी जरूर प्रदान करता है। अचानक से बड़ी सफलता भी इनके हाथ लग सकती है।
एकादश भाव में राहु
कुंडली का एकादश भाव लाभ का कारक होता है। यहां बैठे राहु व्यक्ति को जीवन में कई बार लाभ प्रदान कर सकते हैं। ऐसे लोगों को भाग्य का भी सहयोग मिलता है और परिवार के लोग भी इनका साथ देते हैं। राहु का एकादश भाव में होना व्यक्ति को आर्थिक रूप से भी संपन्न बनाता है। ऐसे लोगों को अप्रत्याशित लाभ जीवन में एक से अधिक बार मिल सकता है। कारोबार के क्षेत्र में भी ऐसे लोग जबरदस्त लाभ पा सकते हैं जिनके ग्यारहवें भाव में राहु होता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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