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Asli Char Dham Yatra: सिर्फ उत्तराखंड नहीं, पूरे भारत के इन 4 कोनों में बसते हैं असली चार धाम; क्या आपको पता है इनके नाम?

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Apr 21, 2026 05:46 pm IST,  Updated : Apr 21, 2026 05:46 pm IST

Asli Char Dham Yatra: चार धाम का कॉन्सेप्ट केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है। यह अद्भुत सफर पूरे भारत में फैले 4 प्रमुख धार्मिक केंद्रों का संगम भी है। इन स्थलों का संबंध विष्णु-शिव की उपासना से है, जो भक्ति, मोक्ष और आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रतीक हैं। जानिए भारत में चार कोनों में बसे असली चारधामों के बारे में।

Char Dham Yatra- India TV Hindi
भारत के असली चार धाम के नाम Image Source : PTI, FACEBOOK AND CANVA

Asli Char Dham Yatra: यूं तो भारत की कई धार्मिक यात्राओं महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन सनातन परंपराओं में चार धाम को अत्यंत पवित्र और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। आमतौर पर ज्यादातर लोग चार धाम की यात्रा को देवभूमि उत्तराखंड के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा से जोड़कर देखते हैं, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अलग और ज्यादा विस्तृत है। बता दें कि भारत के चार अलग-अलग दिशाओं में स्थित ये पवित्र तीर्थ स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र हैं, बल्कि ये सनातन संस्कृति की प्राचीन पहचान और गहरी परंपराओं का भी प्रतीक हैं। आज चर्चा करेंगे सिर्फ उत्तराखंड नहीं, पूरे भारत के इन 4 कोनों में बसे असली चार धामों के बारे में। 

छोटा चार धाम और असली चार धाम का अंतर

सबसे पहले तो बता दें कि उत्तराखंड में स्थित छोटा चार धाम यात्रा में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ शामिल हैं। यह यात्रा उत्तर भारत में अत्यधिक लोकप्रिय है और तीर्थ यात्रियों की आस्था का प्रमुख केंद्र भी है। इसी वजह से इसे कई बार ही चार धाम मान लिया जाता है। यह यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह केवल एक क्षेत्रीय यात्रा है। असली चार धाम भारत के चार अलग-अलग कोनों में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थल हैं। चलिए अब इनके बारे में विस्तार से जान लेते हैं। 

बद्रीनाथ धाम

हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच स्थित बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पवित्र स्थल है। यह अलकनंदा नदी के किनारे बसा हुआ है और इसे सतयुग से जुड़ा दिव्य धाम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान विष्णु ने तपस्या की थी और यही स्थान मोक्ष प्राप्ति का द्वार माना जाता है। जीवन में कम से कम दो बार इस धाम के दर्शन का महत्व बताया गया है। सर्दियों में यहां छह माह तक कपाट बंद रहते हैं और भगवान की पूजा ऊखीमठ में होती है।

जगन्नाथ पुरी

पूर्वी भारत के ओडिशा राज्य में स्थित जगन्नाथ पुरी चार धामों में एक प्रमुख स्थान रखता है। यह भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है, जिन्हें यहां जगन्नाथ के रूप में पूजा जाता है। यह स्थान सात पवित्र पुरियों में भी शामिल है और यहां की रथ यात्रा विश्व प्रसिद्ध है। हर साल भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा विशाल रथों में सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं, जिसे देखने के लिए लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। यह आयोजन आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम माना जाता है।

रामेश्वरम धाम

दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित रामेश्वरम हिंदू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के बीच स्थित एक सुंदर द्वीप है। इसका आकार शंख जैसा माना जाता है। यहां स्थित शिवलिंग को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना गया है। मान्यता है कि भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त करने से पहले यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। यही वह स्थान है जहां से राम सेतु का निर्माण प्रारंभ हुआ था। इसी समुद्री मार्ग से प्रभु श्रीराम देवी सीता को लेने वानर सेना समेत लंका पहुंचे थे। बाद में विभीषण के अनुरोध करने पर राम जी ने एक स्थान पर इस सेतु को तोड़ दिया, जिसे धनुषकोटि के नाम से जाना जाता है। 

द्वारका धाम

पश्चिम भारत के गुजरात राज्य में स्थित द्वारका भगवान कृष्ण की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। इसे चार धामों में पश्चिम दिशा का प्रतिनिधित्व करने वाला तीर्थ स्थल माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने मथुरा छोड़कर यदुवंशियों के साथ इस नगर की स्थापना की थी। समुद्र में समाई प्राचीन द्वारका के अवशेष आज भी आस्था का केंद्र बने हुए हैं। वर्तमान में बेट द्वारका और गोमती द्वारका दो प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। गोमती घाट और निष्पाप कुंड जैसे स्थान यहां की धार्मिक महता को और बढ़ाते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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