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Sankashti Chaturthi 2025 Chandrodya Time, Puja Vidhi: आज है विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी, यहां जानिए इसकी पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र और चंद्रोदय समय

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Sep 10, 2025 07:30 am IST,  Updated : Sep 10, 2025 07:31 am IST

Sankashti Chaturthi 2025 Chandrodya Time, Puja Vidhi: आज आश्विन कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी है जिसे विघ्नराज संकष्टी के नाम से जाना जाता है। इस दिन कई भक्त व्रत रखते हैं और शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की विधि विधान पूजा करते हैं और रात में चंद्र के दर्शन कर अपना व्रत खोलते हैं।

Sankashti Chaturthi- India TV Hindi
आज है विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी Image Source : CANVA

Sankashti Chaturthi 2025 Chandrodya Time, Puja Vidhi: विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी 10 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी। इस तिथि की शुरुआत 10 सितंबर की दोपहर 3 बजकर 37 मिनट से होगी और इसकी समाप्ति 11 सितंबर की दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर होगी। इस अवसर पर भगवान विघ्नराज का पूजन किया जाता है। भगवान विघ्नराज, भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में सातवें स्वरूप हैं। धार्मिक मान्यताओं अनुसार गणेश जी के इस रूप का पूजन करने से समस्त प्रकार के विघ्नों का नाश हो जाता है और कार्यों में सफलता मिलती है।

संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय समय 2025 (Sankashti Chaturthi Chandrodya Time Today)

आज यानी 10 सितंबर 2025 को चांद निकलने का समय रात 8 बजकर 6 मिनट का है।

संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि (Sankashti Chaturthi Puja Vidhi)

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद सूर्य देव को जल चढ़ाएं।
  • फिर घर के पूजा कक्ष को गंगाजल से शुद्ध करें और एक वेदी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
  • फिर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
  • इसके बाद हाथ में जल और चावल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • फिर भगवान गणेश का विधि विधान अभिषेक करें।
  • उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं।
  • उन्हें रोली, लाल फूल, दूर्वा और चंदन अर्पित करें।
  • लड्डू और मिठाइयों का भोग लगाएं।
  • भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें।
  • संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा सुनें।
  • अंत में भगवान गणेश की विधि विधान आरती करें।
  • फिर रात में चंद्रदेव के दर्शन करें और उन्हें अर्घ्य जरूर अर्पित करें।

संकष्टी व्रत के मंत्र (Sankashti Chaturthi Mantra)

  • ॐ गं गणपते नमः
  • ॐ विघ्नराजाय नमः
  • प्रणम्य शिरसा देवां गौरीपुत्रं विनायकम्।

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