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Santan Saptami Aarti: संतान की दीर्घायु के लिए संतान सप्तमी की पूजा में जरूर गाएं ये 3 पावन आरतियां, देखें लिरिक्स

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Sep 17, 2026 02:31 pm IST,  Updated : Sep 17, 2026 02:31 pm IST

संतान सप्तमी के दिन विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा होती है। इसी कारण से पूजा के समय इनकी आरती करना जरूरी माना जाता है। चूंकि किसी भी पूजा की शुरुआत गणेश जी की उपासना से होती है इसलिए इस पूजा में भी गणेश जी की आरती जरूर करें। यहां आप देखेंगे सभी आरतियों के लिरिक्स।

santan saptami aarti- India TV Hindi
संतान सप्तमी की आरती Image Source : INDIA TV

किसी भी व्रत-पूजन में आरती का विशेष महत्व माना जाता है। 18 सितंबर को संतान सप्तमी है। ऐसे में इस दिन की पूजा के समय भी 3 आरतियां जरूर करनी चाहिए। कहते हैं इन आरतियों के बिना संतान सप्तमी की पूजा पूरी नहीं मानी जाती। बता दें इस दिन देवी पार्वती और भगवान शिव की पूजा होती है। इसी कारण से पूजा के समय इनकी आरती करना जरूरी माना जाता है। वहीं पूजा की शुरुआत में गणेश जी की आरती भी जरूर करें क्योंकि हिंदू धर्म में किसी भी पूजा की शुरुआत इसी आरती के साथ की जाती है। चलिए अब आपको बताते हैं इन आरतियों के संपूर्ण लिरिक्स।

संतान सप्तमी की आरती

संतान सप्तमी की पूजा के समय सबसे पहले गणेश जी की आरती करनी चाहिए। इसके बाद माता पार्वती की आरती की जाती है। फिर अंत में शिव जी की आरती करें। कहते हैं इस दिन इन तीनों आरतियों को करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही संतानों को लंबी आयु की प्राप्ति होती है।

॥ श्री गणेशजी की आरती ॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ 

जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ 

एकदन्त दयावन्त,चार भुजाधारी।

माथे पर तिलक सोहे,मूसे की सवारी॥ 

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।

हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।

लड्डुअन का भोग लगे,सन्त करें सेवा॥ 

जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥ 

अंधे को आंख देत, कोढ़िन को काया।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥ 

सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी।

कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी॥ 

जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ 

॥ श्री पार्वती माता की आरती ॥

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।

ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता॥

जय पार्वती माता

अरिकुल पद्म विनाशिनि जय सेवक त्राता।

जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता॥

जय पार्वती माता

सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा।

देव वधू जस गावत, नृत्य करत ताथा॥

जय पार्वती माता

सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता।

हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता॥

जय पार्वती माता

शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता।

सहस्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा॥

जय पार्वती माता

सृष्टि रूप तुही है जननी शिवसंग रंगराता।

नन्दी भृंगी बीन लही सारा जग मदमाता॥

जय पार्वती माता

देवन अरज करत हम चित को लाता।

गावत दे दे ताली, मन में रंगराता॥

जय पार्वती माता

श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता।

सदासुखी नित रहता सुख सम्पत्ति पाता॥

जय पार्वती माता

॥ शिवजी की आरती ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।

हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।

त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।

त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।

सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।

प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा।

पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।

भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंगा बहत है, गल मुण्डन माला।

शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।

नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोइ नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

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