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सर्वपितृ अमावस्या कब है 9 या 10 अक्टूबर? जानिए इस दिन का श्राद्ध क्यों माना जाता है सबसे महत्वपूर्ण

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Oct 08, 2026 11:05 am IST,  Updated : Oct 08, 2026 11:06 am IST

सनातन धर्म में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इस दिन उन सभी मृत परिजनों का श्राद्ध किया जा सकता है जिनकी मृत्यु की तिथि याद न हो या किसी कारण उनका श्राद्ध छूट गया हो।

sarv pitru amavasya- India TV Hindi
सर्वपितृ अमावस्या 2026 Image Source : INDIA TV

पितृ पक्ष में आने वाली अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह श्राद्ध पक्ष का अंतिम दिन भी होता है। कहते हैं यदि कोई सम्पूर्ण तिथियों पर श्राद्ध कर पाने में सक्षम न हो, तो वो मात्र  पितृ पक्ष की अमावस्या तिथि पर भी सभी पितरों का श्राद्ध कर सकता है। कहते हैं इस दिन श्रद्धा भाव से किया गया श्राद्ध, तपर्ण या पिंडदान हमारे सभी पूर्वजों की आत्मा को तृप्त कर देता है। बता दें इस अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या और महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यदि किसी परिजन की मृत्यु की तिथि याद न हो तो उनका श्राद्ध भी आप सर्वपितृ अमावस्या पर कर सकते हैं। चलिए जानते हैं इस साल यह अमावस्या कब मनाई जाएगी।

सर्वपितृ अमावस्या कब है 2026

सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन अमावस्या तिथि रात 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। 

सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध अनुष्ठान समय

  • कुतुप मूहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 तक
  • रौहिण मूहूर्त दोपहर 12:31 से 01:18 तक
  • अपराह्न काल दोपहर 01:18 से 03:37 तक

सर्वपितृ अमावस्या क्यों महत्वपूर्ण है?

दरअसल सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है, जिसे सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के श्राद्ध हेतु सबसे महत्त्वपूर्ण माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को अपने किसी पितर की मृत्यु की तिथि न पता हो या व्यक्ति किसी विशेष तिथि पर अपने पितर का श्राद्ध करने में असमर्थ हो, तो वह  सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करके पुण्य पा सकता है। बता दें इस अमावस्या को महालय अमावस्या भी कहा जाता है। महालय यानी वह महान तिथि जिसमें सभी पितरों का आवाहन कर उनका एक साथ पूजन किया जा सके।

कहते हैं पितृ पक्ष में पृथ्वीलोक पर आए पितर अमावस्या तिथि को विदा लेते हैं। इसी कारण से इस दिन विधिपूर्वक किया गया श्राद्ध पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करता है। इस शुभ तिथि पर ब्राह्मण भोज, वस्त्र दान, तिलदान, जल स्रोतों पर जलदान, दीपदान और गाय को हरा चारा अर्पित करना बेहद पुण्य का काम माना गया है। इतना ही नहीं कहा ये भी जाता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से किया गया श्राद्ध पितृ ऋण से भी मुक्ति दिला देता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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