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Shani Chalisa Niyam: शनि चालीसा दिलाएगी शनि दोष से मुक्ति, पहले जान लें चालीसा पाठ के नियम और विधि

 Written By: Arti Azad
 Published : Jun 06, 2026 08:21 am IST,  Updated : Jun 06, 2026 08:27 am IST

Shani Chalisa Paath Ke Niyam: शनिवार के दिन शनि पूजा का विधान है, जो कि शनि दोष से मुक्ति में बहुत लाभदायक मानी जाती है। ऐसी मान्यताएं हैं कि इस दिन शनि चालीसा का पाठ करने से उनकी कृपा प्राप्ति होती है। लेकिन इसके भी कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से ही शुभ फल मिल सकता है।

Shani chalisa- India TV Hindi
शनि चालीसा पाठ के नियम Image Source : INDIA TV

Shani Chalisa Paath Ke Niyam: शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन सच्चे मन और पूरे नियम से शनिदेव की आराधना का फल जरूर मिलता है और उनकी कृपा से जीवन की समस्याएं दूर होती हैं। सनातन धर्म शास्त्रों में कर्मफलदाता को प्रसन्न करने के कई तरीके बताए गए हैं। इसमें सबसे आसान उपाय माना जाता है शनिवार को शनि चालीसा का पाठ। माना जाता है कि सच्ची आस्था और श्रद्धा से किया गया शनि चालीसा का पाठ व्यक्ति को शनि दोष से भी मुक्ति दिला सकता है। यहां पढ़िए शनि चालीसा के संपूर्ण लिरिक्स। 

शनि चालीसा पाठ के नियम क्या हैं? (Shani Chalisa Paath Ke Niyam)

शनि चालीसा का पाठ करने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। ऐसी मान्यता है कि चालीसा पाठ का लाभ तभी मिलता है जब नियमों का पालन किया जाए। जानिए शनि चालीसा को पढ़ने के जरूरी नियम कौन से हैं।

  • शनि चालीसा का पाठ करने वाले जातक का मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।
  • हालांकि, आप किसी भी दिन इस चालीसा का पाठ कर सकते हैं, लेकिन शनिवार का दिन इसके लिए सर्वोत्तम माना गया है। 
  • ब्रह्म मुहूर्त या फिर सूर्यास्त के बाद शनि चालीसा का पाठ करना लाभदायक माना जाता है। 
  • शनि चालीसा पाठ के दौरान मन को शांत रखें। 
  • शनिवार के दिन मदिरा और तामसिक भोजन जैसे प्याज-लहसुन से बना खाना, मास, अंडा, मछली आदि का सेवन न करें।
  • शनिवार के दिन पूजा के दौरान गलत विचारों को मन पर हावी न होने दें, किसी से भी वाद-विवाद न करें। 

शनि चालीसा पाठ करने की विधि (Shani Chalisa Paath Vidhi)

  • शनिवार के दिन सुबह स्नान करें और काले या नीले रंग के कपड़े पहनें। 
  • शनि देव की तस्वीर के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  • घर में संभव हो तो पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शनि चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
  • चालीसा के बाद "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जाप करें।
  • आखिर में अनजाने में आपसे हुई गलतियों और भूल-चूक के लिए शनि देव से माफी मांगें।

शनि चालीसा (Shani Chalisa)

|| दोहा ||

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।

दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

|| चौपाई ||
जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥

परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥

पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥

बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥
लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥

रावण की गति-मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥
तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥
कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥
शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥

तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥

समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥

|| दोहा ||

पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

शनि चालीसा पीडीएफ Shani Chalisa Paath PDF

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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