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Shri Navgrah Pidahar Stotram: होलाष्टक के दौरान करें नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ, सभी ग्रह होंगे शांत, विघ्न-बाधाओं से मिलेगी मुक्ति

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Feb 22, 2026 08:34 am IST,  Updated : Feb 22, 2026 08:35 am IST

Shri Navgrah Pidahar Stotram: नवग्रहण पीड़ाहर स्तोत्र कुंडली के सभी ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति को अनुकूल करता है। होलाष्टक के दौरान इस स्तोत्र का पाठ करने बेहद शुभ माना जाता है।

Navgrah Pidahar Stotra - India TV Hindi
नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र Image Source : FREEPIK

Shri Navgrah Pidahar Stotram: श्री नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का वर्णन ब्रह्माण्ड पुराण में मिलता है। इस स्तोत्र को बेहद प्रभावशाली माना जाता है। इसका पाठ करने से सभी नौ ग्रह- सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, शनि, शुक्र, राहु और केतु के बुरे प्रभाव दूर होने लगते हैं। ये सभी ग्रह शांत होकर आपके जीवन की बाधाओं को भी दूर करने लगते हैं। इस स्तोत्र का पाठ होलाष्टक के साथ ही प्रत्येक शनि और रविवार को करना भी बेहद शुभ माना जाता है। अगर आप भी कुंडली में ग्रहों की स्थिति को सुधारना चाहते हैं तो इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। होलाष्टक में नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं ऐसे में नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ करके सकारात्मकता आप जीवन में ला सकते हैं।  आपको बता दें कि साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 तक रहेंगे।

श्री नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र

।श्री गणेशाय नमः।


ग्रहाणामादिरादित्यो लोकरक्षणकारकः।
विषमस्थानसम्भूतं पीड़ां हरतु मे रविः ॥1॥
(सूर्य देव मेरे सभी कष्ट हरें) 

रोहिणीशः सुधांशुश्च सुधागात्रः सुधाशनः।
विषमस्थानसम्भूतं पीड़ां हरतु मे विधुः ॥2॥
(चंद्रमा मेरे सभी कष्ट हरें) 

भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत्सदा।
वृष्टिकृद् वृष्टिहर्ता च पीड़ां हरतु मे कुजः ॥3॥
(मंगल देव मेरे सभी कष्ट हरें) 

उत्पातरूपो जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युतिः।
सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीड़ां हरतु मे बुधः ॥4॥
(बुध देव मेरे सभी कष्ट हरें) 

देवमन्त्री विशालाक्षः सदा लोकहिते रतः।
अनेकशिष्यसम्पूर्णः पीड़ां हरतु मे गुरुः ॥5॥
(बृहस्पति देव मेरे सभी कष्ट हरें) 

दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामतिः।
प्रभुस्ताराग्रहाणां च पीड़ां हरतु मे भृगुः ॥6॥
(शुक्र देव मेरे सभी कष्ट हरें) 

सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्षः शिवप्रियः।
मन्दचारः प्रसन्नात्मा पीड़ां हरतु मे शनिः ॥7॥
(शनि देव मेरे सभी कष्ट हरें) 

अनेक रूपवर्णैश्च शतशोऽथ सहस्रशः।
उत्पातरूपो जगतां पीड़ां हरतु मे तमः ॥8॥
(राहु देव मेरे सभी कष्ट हरें) 

महाशिरा महावक्त्रो दीर्घदंष्ट्रो महाबलः।
अतनुश्चोर्ध्वकेशश्च पीड़ां हरतु मे शिखी ॥9॥
(केतु देव मेरे सभी कष्ट हरें) 

॥ इति श्रीवेदव्यासविरचितं नवग्रहपीड़ाहरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥ 

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