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किसने लगाया था सबसे पहले सिंदूर, कैसे शुरू हुई परंपरा? इन धार्मिक शास्त्रों में है इसका जवाब

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : May 08, 2025 08:09 am IST,  Updated : May 08, 2025 08:09 am IST

भारतीय सभ्यता में सिंदूर लगाने की परंपरा का जिक्र सदियों से चला आ रहा है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि किसने सबसे पहले सिंदूर लगाया था और कैसे ये परंपरा शुरू हुई।

Sindoor lagane ki parampara- India TV Hindi
सिंदूर लगाने की परंपरा कैसे शुरू हुई Image Source : META AI

सिंदूर हर हिंदू विवाहित महिला की पहचान है। सिंदूर को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है और ये विवाहित महिला की शक्ति और समर्पण का भी प्रतीक है। यही वजह है कि हर हिंदू महिला विवाह के बाद मांग में सिंदूर भरती है। कई हिंदू धर्म शास्त्रों में सिंदूर लगाने के महत्व के बारे में बताया भी गया है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि सिंदूर लगाने की परंपरा कब से शुरू हुई थी और सबसे पहले सिंदूर किसने लगाया था। 

सिंदूर को लेकर क्या लिखा है धर्म शास्त्रों में?

वैदिक काल में भी स्त्रियां अपनी मांग में सिंदूर लगाती थीं, इस बात के साक्ष्य हमको ऋग्वेद और अथर्ववेद में मिलते हैं। वेदों में बताया गया है कि विवाहित स्त्रियां अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए सिंदूर लगाती थीं। वैदिक काल के दौरान सिंदूर को कुंकुम कहा जाता था। सिंदूर को वैदिक काल में पंच-सौभाग्य में शामिल किया गया था। पंच सौभाग्य बालों पर पुष्प, मंगल सूत्र, पैर की उंगली में छल्ले, चेहरे पर हल्दी और सिंदूर को कहा गया है।   

सिंदूर सबसे पहले किसने लगाया? 

शिव पुराण में वर्णन मिलता है कि माता पार्वती ने वर्षों तक शिव जी को वर के रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या की थी। जब भगवान शिव ने मां पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर लिया तो मां पार्वती ने सुहाग के प्रतीक के रूप में सिंदूर मांग में लगाया था। साथ ही उन्होंने कहा था कि जो स्त्री सिंदूर लगाएगी उसकी पति को सौभाग्य और लंबी आयु की प्राप्ति होगी। धार्मिक मतों के अनुसार सबसे पहले माता पार्वती ने ही सिंदूर लगाया था और तभी से ये परंपरा चल पड़ी। 

त्रैता और द्वापर युग में भी महिलाएं लगाती थीं सिंदूर 

रामायण कालीन एक कथा है कि एक बार हनुमान जी ने माता सीता को सिंदूर लगाते देख लिया। इसके बाद जिज्ञासावश हनुमान जी ने माता सीता से पूछा कि आप सिंदूर क्यों लगाती हैं। सीता जी बोलीं की राम जी की दीर्घायु और सुख के लिए। यह सुनकर रामभक्त हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया था, ताकि उनके प्रभु को लंबी आयु और सुख प्राप्त हो। इसलिए आज भी हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाया जाता है। यानि त्रेता युग में भी सिंदूर का प्रचलन था। इसके साथ ही द्वापर युग में द्रौपदी के सिंदूर लगाने का वर्णन स्कंद पुराण में मिलता है। 

सिंधु घाटी सभ्यता और सिंदूर

दुनिया की प्राचीन सभ्यताओं में से एक सिंधु घाटी की सभ्यता से भी कुछ ऐसे सबूत मिलते हैं जो बताते हैं कि सिंदूर लगाने की परंपरा तब भी थी। सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी कुछ ऐसी मूर्तियां मिली हैं जिनमें महिलाओं की मांग में सिंदूर लगाने के साक्ष्य हैं। इस काल से जुड़ी देवियों की कुछ ऐसी मूर्तियां मिली हैं जिनके सिर के बीच में एक सीधी रेखा है और उस पर लाल रंग भरा गया है। पुरातत्वविदों का मानना है कि यह और कुछ नहीं बल्कि सिंदूर है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इंडिया टीवी इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।)

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