सनातन धर्म में कार्तिक मास को दीपदान और तुलसी पूजन के लिए सबसे पवित्र महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान तुलसी की पूजा करने से भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है। यही वजह है कि इन पूरे महीने में कई लोग नियमित रूप से तुलसी के पौधे के समक्ष घी का दीपक जलाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दीपक जलाने के साथ यदि आप तुलसी माता की आरती भी गाते हैं, तो इससे मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है? आइए जानते हैं कार्तिक मास में तुलसी आरती का महत्व और सही विधि।
कार्तिक मास में तुलसी पूजन और आरती का समय
वैसे तो तुलसी जी की पूजा सुबह और शाम दोनों समय की जा सकती है, लेकिन यदि सबसे उत्तम समय की बात करें तो इसके लिए 'संध्या काल' (प्रदोष काल) को सबसे शुभ माना जाता है। कार्तिक मास के पूरे महीने में सूर्यास्त के समय तुलसी के पौधे के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाएं और पूरी श्रद्धा के साथ उनकी आरती करें।
तुलसी माता की आरती
तुलसी महारानी नमो-नमो,
हरि की पटरानी नमो-नमो ।
धन तुलसी पूरण तप कीनो,
शालिग्राम बनी पटरानी ।
जाके पत्र मंजरी कोमल,
श्रीपति कमल चरण लपटानी ॥
तुलसी महारानी नमो-नमो,
हरि की पटरानी नमो-नमो ।
धूप-दीप-नवैद्य आरती,
पुष्पन की वर्षा बरसानी ।
छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन,
बिन तुलसी हरि एक ना मानी ॥
तुलसी महारानी नमो-नमो,
हरि की पटरानी नमो-नमो ।
सभी सखी मैया तेरो यश गावें,
भक्तिदान दीजै महारानी ।
नमो-नमो तुलसी महारानी,
तुलसी महारानी नमो-नमो ॥
तुलसी महारानी नमो-नमो,
हरि की पटरानी नमो-नमो ।
श्री तुलसी स्तुति
तुलसि श्रीसखि शुभे पापहारिणि पुण्यदे ।
नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये ॥ 1॥
मनः प्रसादजननि सुखसौभाग्यदायिनि ।
आधिव्याधिहरे देवि तुलसि त्वां नमाम्यहम् ॥ 2॥
यन्मूले सर्वतीर्थानि यन्मध्ये सर्वदेवताः ।
यदग्रे सर्व वेदाश्च तुलसि त्वां नमाम्यहम् ॥ 3॥
अमृतां सर्वकल्याणीं शोकसन्तापनाशिनीम् ।
आधिव्याधिहरीं नॄणां तुलसि त्वां नमाम्यहम् ॥ 4॥
देवैस्त्चं निर्मिता पूर्वं अर्चितासि मुनीश्वरैः ।
नमो नमस्ते तुलसि पापं हर हरिप्रिये ॥ 5॥
सौभाग्यं सन्ततिं देवि धनं धान्यं च सर्वदा ।
आरोग्यं शोकशमनं कुरु मे माधवप्रिये ॥ 6॥
तुलसी पातु मां नित्यं सर्वापद्भयोऽपि सर्वदा ।
कीर्तिताऽपि स्मृता वाऽपि पवित्रयति मानवम् ॥ 7॥
या दृष्टा निखिलाघसङ्घशमनी स्पृष्टा वपुःपावनी
रोगाणामभिवन्दिता निरसनी सिक्ताऽन्तकत्रासिनी ।
प्रत्यासत्तिविधायिनी भगवतः कृष्णस्य संरोपिता
न्यस्ता तच्चरणे विमुक्तिफलदा तस्यै तुलस्यै नमः ॥ 8॥
॥ इति श्री तुलसीस्तुतिः ॥
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
यह भी पढ़ें: