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धनतेरस पर धन के देवता कुबेर को प्रसन्न करने के लिए करें इन मंत्रों का जाप, जानें पूजा का तरीका

 Written By: Arti Azad
 Published : Nov 05, 2026 09:11 pm IST,  Updated : Nov 05, 2026 09:11 pm IST

धनतेरस पर भगवान कुबेर की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन कुबेर देव की प्रतिमा या तिजोरी के सामने पूजा करके मंत्रों का जाप किया जाता है। जानिए कुबेर के दुर्लभ मंत्र, अष्टाक्षर मंत्र और पूजा से जुड़ी खास बातें।

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भगवान कुबेर के मंत्र Image Source : INDIA TV

धनतेरस का त्योहार सुख-समृद्धि और धन की कामना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की पूजा करने की भी परंपरा है। धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में उनकी पूजा करके विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है। आइए जानते हैं भगवान कुबेर के प्रमुख मंत्र, जाप की विधि और हवन से जुड़ी मान्यताएं।

कुबेर मंत्र और जाप की विधि

धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। भगवान कुबेर को धन-संपदा का अधिपति माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्हें पृथ्वी की धन-संपत्ति का स्वामी और भगवान शिव का प्रिय सेवक माना गया है। इसी वजह से धनतेरस पर उनकी पूजा और मंत्र जाप की परंपरा है।

इस विधि से करें मंत्र जाप

धनतेरस के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा स्थल पर कुबेर की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। अगर प्रतिमा उपलब्ध न हो, तो तिजोरी को कुबेर का प्रतीक मानकर पूजा कर सकते हैं। इसके बाद श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप करें और अंत में विधि-विधान से आरती करें। मान्यता के अनुसार, कुबेर मंत्र की साधना दक्षिण दिशा की ओर मुख करके की जाती है।

कुबेर देव का दुर्लभ मंत्र

धनतेरस पर भगवान कुबेर की आराधना के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है।

मंत्र: ॐ श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः।

विनियोग

अस्य श्री कुबेर मंत्रस्य विश्वामित्र ऋषिः, बृहती छन्दः, शिवमित्र धनेश्वरो देवता, समाभीष्टसिद्धयर्थे जपे विनियोगः।

अष्टाक्षर मंत्र से करें आराधना

श्रद्धा और एकाग्रता के साथ भगवान कुबेर का अष्टाक्षर मंत्र का जाप किया जाता है। मंत्र इस प्रकार है: ॐ वैश्रवणाय स्वाहा।

धन-धान्य समृद्धि का मंत्र

कुबेर देव की पूजा में धन-धान्य की समृद्धि के लिए इस मंत्र का भी उल्लेख मिलता है। मंत्र इस प्रकार है: ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्य समृद्धिं देहि मे दापय दापय स्वाहा।

हवन से जुड़ी मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुबेर मंत्र की साधना में मंत्र जाप के बाद दशांश हवन का विधान बताया गया है। इसके लिए तिल का उपयोग किया जाता है। परंपरागत विधान में सूर्योदय से पहले शिव मंदिर में हवन करना उत्तम माना गया है। बिल्वपत्र के वृक्ष की जड़ों के पास बैठकर यह अनुष्ठान करना भी शुभ बताया गया है। मंत्र जाप की निर्धारित संख्या और हवन जैसे अनुष्ठान योग्य पुरोहित के मार्गदर्शन में करना उचित रहता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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