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क्या है वाराणसी की कहानी? इसे क्यों कहा जाता है दुनिया का सबसे प्राचीन शहर, किसने की इसकी स्थापना

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Nov 17, 2025 08:06 am IST,  Updated : Nov 17, 2025 08:12 am IST

इन दिनों एसएस राजामौली की फिल्म वाराणसी काफी चर्चा में है। जिसमें महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा और पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिका में हैं। इस फिल्म को आने में भले ही समय है लेकिन इस बीच वाराणसी शहर को लेकर लोगों की जिज्ञासा काफी ज्यादा बढ़ गई है। क्या आप जानते हैं कि ये शहर दुनिया के सबसे प्राचीन जीवित नगरों में एक है।

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वाराणसी की कहानी Image Source : CANVA

Varanasi Ki Kahani: 'वाराणसी' जिसे काशी और बनारस के नाम से भी जाना जाता है ये सिर्फ एक शहर ही नहीं है बल्कि हिंदुओं की आस्था का बड़ा केंद्र भी है। ऐसा माना जाता है कि इस शहर की स्थापना स्वंय भगवान भोलेनाथ ने की है। इस शहर का उल्लेख वेदों, पुराणों और उपनिषदों में भी मिलता है। काशी को मोक्षदायिनी भूमि, शिव की प्रिय नगरी और त्रिशूल पर स्थित दिव्य धाम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार संपूर्ण वाराणसी शहर भगवान शिव के त्रिशूल पर विराजमान हैं। चलिए आपको बताते हैं वाराणसी शहर की दिव्य कथा के बारे में।

कैसे पड़ा वाराणसी का नाम?

वाराणसी शहर का नाम दो नदियों, वरुणा और असि के नामों से मिलकर पड़ा है। इन नदियों के बीच स्थित होने की वजह से ही इसका नाम 'वाराणसी' पड़ा, जिसका अर्थ है वरुणा और असि के बीच की भूमि। इसके अलावा इस शहर को काशी और बनारस के नाम से भी जाना जाता है। काशी को भगवान शिव की नगरी माना गया है।

वाराणसी की कहानी

पौराणिक कथाओं अनुसार वाराणसी शहर के रक्षस स्वयं भगवान शिव हैं। कहा जाता है कि ये नगरी शिव के त्रिशूल पर ही टिकी है जिस कारण से इसका कभी नाश नहीं हो सकता। हिंदू धर्मग्रंथों में काशी का उल्लेख कई स्थानों पर मिलता है। स्कंद पुराण और काशी खंड में बताया गया है कि भगवान शिव को यह नगरी इतनी प्रिय है कि उन्होंने इसे अपने निवास स्थान के रूप में चुना। धर्म शास्त्रों में ये भी बताया गया है कि जब प्रलय आता है और पूरी सृष्टि नष्ट हो जाती है, तब भी काशी अपनी जगह पर टिकी रहती है। यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी माना जाता है। काशी में भगवान शिव बाबा विश्वनाथ के रूप में निवास करते हैं। कहा जाता है कि काशी में मृत्यु को प्राप्त करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इसलिए भगवान शिव ने वाराणसी को त्रिशूल पर किया धारण

वाराणसी को भगवान शिव और देवी पार्वती का घर माना गया है। कथाओं के अनुसार जब असुरों और देवताओं के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया था तो असुरों ने काशी में हाहाकार मचा दिया था। तब भगवान शिव ने अपने त्रिशूल का प्रयोग कर काशी की रक्षा की। कहते हैं त्रिशूल पर वाराणसी को स्थापित करने का उद्देश्य इस नगरी को विनाश और कालचक्र से परे रखना था। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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