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व्रत वाली आषाढ़ पूर्णिमा 29 जुलाई को, नोट कर लें पूजा विधि और मुहूर्त

 Published : Jul 28, 2026 07:07 am IST,  Updated : Jul 28, 2026 02:58 pm IST

पंचांग अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा 28 जुलाई 2026 की शाम 6 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 29 जुलाई की रात 8 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार पूर्णिमा व्रत 29 जुलाई को रखा जाएगा।

आषाढ़ पूर्णिमा 2026- India TV Hindi
आषाढ़ पूर्णिमा 2026 Image Source : INDIA TV

सनातन धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इस पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा और गुरु पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं इस दिन व्रत रखने से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। पूर्णिमा पर कई श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। तो कई जगह इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना की जाती है। इसके साथ ही इस दिन चंद्रदेव के पूजन का भी विशेष महत्व माना जाता है। वहीं पूर्णिमा का दिन भगवान सत्यनारायण की कथा कराने के लिए भी अत्यंत शुभ होता है। चलिए आपको बताते हैं आषाढ़ पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि और मुहूर्त।

जुलाई में व्रत वाली पूर्णिमा कब है 2026

व्रत वाली पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 को है। इस दिन पूर्णिमा तिथि रात 8 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। वहीं पूर्णिमा उपवास के दिन चन्द्रोदय शाम 07:21 पर होगा।

आषाढ़ पूर्णिमा शुभ मुहूर्त 2026

  • ब्रह्म मुहूर्त - 04:17 AM से 04:59 AM
  • अमृत काल - 08:34 AM से 10:20 AM
  • प्रातः सन्ध्या - 04:38 AM से 05:41 AM
  • विजय मुहूर्त - 02:43 PM से 03:37 PM
  • गोधूलि मुहूर्त - 07:14 PM से 07:35 PM
  • सायाह्न सन्ध्या - 07:14 PM से 08:17 PM

पूर्णिमा व्रत विधि

  • पूर्णिमा व्रत के दिन प्रातःकाल उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान कर तर्पण करना चाहिए।
  • अगर नदी स्नान संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • इसके बाद व्रत का संकल्प लें - "मैं अपने परिवार की कुशलता और सुख-समृद्धि की कमाना से पूर्णिमा का व्रत करूंगा। व्रत के निर्विघ्न रूप से पूर्ण होने हेतु मैं भगवान गणपति की पूजा और कलश पूजन भी करूंगा या करूंगी।"
  • संकल्प लेने के बाद सबसे पहले कलश स्थापना करें। फिर भगवान गणेश का पूजन करें।
  • इसके बाद भगवान शिव और देवी पार्वती की षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना करें।
  • जो लोग पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं वे उनकी विधिवत पूजा-अर्चना करें।
  • रात में चन्द्रदेव का पूजन भी जरूर करें।
  • पूरे दिन व्रत रहें। फिर शाम में श्रद्धापूर्वक पूर्णिमा व्रत की कथा का पाठ करें।
  • रात में चन्द्रदेव को अर्घ्य अर्पित कर उनका पूजन करें।

पूर्णिमा व्रत में क्या खाना चाहिए?

पूर्णिमा उपवास में जल, फल और दूध से बने सात्विक पदार्थों जैसे खीर, पनीर इत्यादि का सेवन किया जाता है। वहीं कई लोग इस दिन सिर्फ जल पर उपवास रहते हैं।

पूर्णिमा व्रत का पारण कब किया जाता है?

पूर्णिमा व्रत का पारण ज्यादातर लोग चन्द्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद करते हैं। पारण के लिए किसी ब्राह्मण को यथाशक्ति अन्न, तिल, चावल, वस्त्र, घी आदि का दान करना चाहिये। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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