फिल्म 'रामायण' के ट्रेलर रिलीज के साथ ही इंटरनेट पर 'ब्रह्म मुहूर्त' तेजी से ट्रेंड करने लगा है। कई लोगों के मन में ये सवाल आ रहा होगा कि आखिर ये ब्रह्म मुहूर्त होता क्या है और क्यों फिल्म के मेकर्स ने इस समय को चुना होगा? तो आपको बता दें सनातन धर्म में इस समय का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह कोई साधारण समय नहीं है, बल्कि 'ईश्वरीय समय' है। इस दौरान संपूर्ण ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अपने चरम पर होता है। धर्म ग्रंथों और शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में शुरू किया गया कोई भी शुभ कार्य कभी असफल नहीं होता। चलिए जानते हैं ब्रह्म मुहूर्त का धार्मिक महत्व और इसके अद्भुत फायदे।
ब्रह्म मुहूर्त क्या है और यह कब होता है?
ब्रह्म का अर्थ है परमात्मा यानी परम ज्ञान और मुहूर्त का अर्थ है समय, यानी ब्रह्म मुहूर्त का अर्थ हुआ 'परमात्मा का समय'। यह समय सूर्योदय से ठीक 1 घंटा 36 मिनट पहले शुरू होता है और 48 मिनट तक रहता है। आमतौर पर सुबह 4:00 बजे से 5:30 बजे के बीच का समय ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है।
ब्रह्म मुहूर्त का धार्मिक महत्व
- सनातन धर्म में ब्रह्म मुहूर्त को परमात्मा और सृजन का समय माना गया है।
- रामायण अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठने से व्यक्ति को सुंदरता, धन-वैभव, अच्छे स्वास्थ्य और तेज बुद्धि की प्राप्ति होती है।
- कहते हैं इस समय में दैवीय ऊर्जा सबसे अधिक होती है।
- प्राचीन काल में ऋषि-मुनि ब्रह्म मुहूर्त में उठते थे, क्योंकि यह समय ध्यान, योग और पूजा-अर्चना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
- शास्त्रों के अनुसार, इस समय संपूर्ण ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव सबसे अधिक होता है और नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह से निष्क्रिय रहती है।
- धार्मिक मान्यता है कि इस समय पर देवी-देवता आकाश मार्ग में भ्रमण कर रहे होते हैं, ऐसे में जो कोई भी इस समय पर जागकर ईश्वर की उपासना करता है तो उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
- माना जाता है कि इस मुहूर्त में संकल्प लेकर शुरू किया गया कोई भी शुभ कार्य कभी असफल नहीं होता।
ब्रह्म मुहूर्त का वैज्ञानिक महत्व
- इस समय का केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक की दृष्टि से भी विशेष महत्व माना जाता है।
- कहते हैं इस समय दिमाग शांत रहता है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए यह समय पढ़ाई करने के लिए सबसे उत्तम होता है।
- इस समय पर उठने से तनाव कम होता है।
- इस समय पर वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा सबसे अधिक होती है, जो शरीर के लिए संजीवनी का काम करती है।
- आयुर्वेद के अनुसार, इस समय पर उठने से वात, पित्त, कफ संतुलित रहते हैं, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- ब्रह्म मुहूर्त में उठने से शरीर में दिनभर ऊर्जा बनी रहती है।
ब्रह्म मुहूर्त में क्या करना चाहिए?
- इस समय पर स्नान करके ईश्वर की उपासना करनी चाहिए।
- ईश्वर के मंत्रों का जाप करना चाहिए।
- यह समय पढ़ाई करने या आत्म-चिंतन के लिए भी उत्तम होता है।
- इस समय पर शुभ काम की शुरुआत करनी चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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