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Yam Deepak 2026: यम दीपक कब जलाया जाएगा 6 या 7 नवंबर? नोट कर लें सही तारीख, मुहूर्त और विधि

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Nov 05, 2026 08:33 am IST,  Updated : Nov 05, 2026 08:44 am IST

यम दीपक अधिकतर लोग धनतेरस के दिन जलाते हैं तो कुछ छोटी दीवाली के दिन भी जलाते हैं। कहते हैं यम दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है। जानिए इस साल यम दीपक कब जलाया जाएगा और इसे जलाने का शुभ समय क्या रहेगा।

यम दीपक कब जलाया जाएगा 6 या 7 नवंबर?- India TV Hindi
यम दीपक कब जलाया जाएगा 6 या 7 नवंबर? Image Source : INDIA TV

यम दीपक कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को यानी धनतेरस के दिन जलाया जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी, कुबेर देवता और भगवान धन्वंतरि के साथ-साथ मृत्यु के देवता यमराज की भी पूजा होती है। मान्यताओं के अनुसार यम दीपक जलाने से घर के किसी भी सदस्य को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। यम दीपक को यम दीपम या यम दीपदान के नाम से भी जाना जाता है। जानिए इस साल यम दीपक कब जलेगा और इसे जलाने का शुभ समय क्या रहने वाला है।

यम दीपक कब जलेगा 2026

यम दीपक 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को जलेगा। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर की सुबह 10:30 से शुरू होकर 7 नवंबर की सुबह 10:47 बजे तक रहेगी।

यम दीपक मुहूर्त 2026

यम दीपक जलाने या निकालने का मुहूर्त 6 नवंबर की शाम 05:33 से 06:51 बजे तक रहेगा। 

यम दीपक जलाने की विधि

  • यम दीपक धनतेरस की शाम को घर के मुख्य द्वार पर जलाया जाता है।
  • यम दीपक जलाने से पहले माता लक्ष्मी, कुबेर देवता और धन्वंतरि भगवान की विधि विधान पूजा की जाती है। 
  • पूजा के बाद यम के लिए एक चौमुखा दीपक तैयार किया जाता है।
  • इस दीपक को घर के मुख्य द्वार पर इस तरह से रखा जाता है जिससे इसका मुख दक्षिण दिशा की ओर रहे।
  • यह दीपक सरसो या तिल के तेल से जलाया जाता है और इसमें चार बत्तियां रखी जाती हैं।
  • दीपक के नीचे थोड़े से अक्षत जरूर रखें।
  • दीपक जलाने के बाद हाथ जोड़कर यमराज का ध्यान करें और अपने परिवार की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना करें।

यम दीपक जलाते समय कौन सा मंत्र बोलें?

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह. त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥ 

धनतेरस पर यम का दीपक क्यों जलाया जाता है?

ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज का दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। पौराणिक कथा के अनुसार राजा हेम के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग था। ऐसे में जब यमराज के दूत उनके प्राण लेने आए तो उनकी पत्नी ने दीपक जलाकर और घर को सजाकर यमदूतों का ध्यान भटकाया। साथ ही पूरी रात यमराज के नाम का दीपक जलता रहा जिससे राजकुमार की जान बच गई। कहते हैं तभी से ऐसा माना जाने लगा कि धनतेरस पर यमराज के नाम से दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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