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Puja Ghar Vastu Tips: किस दिशा में होना चाहिए पूजा स्थान, घर में मंदिर बनवाते समय न करें गलती

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jun 05, 2026 03:01 pm IST,  Updated : Jun 05, 2026 03:07 pm IST

Puja Ghar Vastu Tips: वास्तु में पूजा घर की दिशा का विशेष महत्व बताया है। सही दिशा सुख-समृद्धि और मानसिक शांति देती है, जबकि इसकी गलत दिशा वास्तु दोष और कई तरह की परेशानियां बढ़ा सकता है। जानें वास्तु में घर के मंदिर शुभ और अशुभ दिशाएं क्या बताई गई हैं।

Puja Ghar Vastu Tips- India TV Hindi
घर में मंदिर बनाते समय न करें ये गलती Image Source : PEXELS

Puja Ghar Vastu Tips: भारतीय संस्कृति में घर का मंदिर आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। कुछ घरों में पूरा एक कमरा भगवान जी के लिए बनवाते हैं, जबकि कुछ लोग उपलब्ध जगह के अनुसार घर में मंदिर स्थापित करते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में मंदिर बना लेना काफी नहीं और न ही इसे कहीं भी स्थापित करना उचित है। पूजा घर की दिशा का सीधा संबंध घर में प्रवाहित होने वाली ऊर्जा से होता है। जानें कौन-सी दिशा पूजा घर के लिए सबसे शुभ मानी जाती है और किन दिशाओं से बचना चाहिए।

क्यों अहम है मंदिर की सही दिशा?

वास्तु की माने तो घर में मौजूद हर दिशा विशेष प्रकार की ऊर्जा को प्रभावित करती है। पूजा कक्ष घर का वह स्थान माना जाता है, जहां की आध्यात्मिक ऊर्जा पूरे घर में फैलती है। सही दिशा में बना मंदिर सुख, शांति और समृद्धि का कारण बन सकता है, जबकि गलत दिशा में बना पूजा स्थल कई तरह की दिक्कतें बढ़ा सकता है। इसलिए मंदिर की दिशा का सही चयन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 

पूजा घर के लिए सबसे शुभ दिशा

पूजा घर के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) को सबसे शुभ माना जाता है। इस दिशा में देवी-देवताओं का वास बताया है। सुबह के समय इस दिशा में सूर्य की किरणों और प्राकृतिक ऊर्जाओं का विशेष प्रभाव पड़ता है, जिससे घर में पॉजिटिविटी आती है। वास्तु विशेषज्ञ भी सबसे पहले इसी दिशा में मंदिर स्थापना करने की सलाह देते हैं।

ईशान कोण के लाभ

ऐसा माना जाता है कि उत्तर-पूर्व दिशा में मंदिर होने से परिवार के सदस्यों का मन शांत रहता है। इसके अलावा सभी का स्वास्थ्य बेहतर रहता है, मानसिक तनाव कम होता है और आपसी प्रेम बना रहता है। वहीं, परिवार के लोगों में आध्यात्मिक रुचि बढ़ती है और निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होती है।

पूर्व दिशा भी है शुभ

अगर घर की संरचना के कारण ईशान कोण में मंदिर बनाना संभव न हो तो पूर्व दिशा भी बेहतर विकल्प माना जाता है। इस दिशा का संबंध सूर्य देव से बताया है, जो नई शुरुआत, उन्नति और सफलता का प्रतीक है। यहां बना पूजा घर व्यक्ति को सकारात्मक सोच देने वाला माना जाता है।

उत्तर दिशा भी है अनुकूल 

उत्तर दिशा भी पूजा घर के लिए अनुकूल मानी जाती है। वास्तु में इस दिशा का संबंध धन के देवता कुबेर से बताया गया है। मान्यता है कि यहां मंदिर होने से आर्थिक स्थिरता बनी रहती है। साथ ही बिजनेस और नौकरी में नए अवसर मिलने की संभावना बढ़ती है। 

इस दिशा में मंदिर बनाने से करें परहेज

दक्षिण-पश्चिम दिशा में पूजा घर बनाना वास्तु अनुसार उचित नहीं है। इस दिशा की ऊर्जा देवी-देवताओं की आराधना के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती। मान्यता है कि यहां मंदिर होने से व्यक्ति में असंतोष और लालच की भावना बढ़ सकती है। इसके अलावा आर्थिक परेशानियां, व्यापार में नुकसान और मानसिक तनाव जैसी स्थितियां बनी रहती है। 

पूजा करते समय किस दिशा में हो मुख?

वास्तु की माने तो पूजा, ध्यान, मंत्र जाप आदि के दौरान व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इन दिशाओं को सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत कहा जाता है। पूजा घर में देवी-देवताओं की मूर्तियां या तस्वीरें इस प्रकार स्थापित करें, जिससे पूजा करने वाले का चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे। मान्यता है कि इससे मन अधिक एकाग्र होता है और पूजा का प्रभाव बढ़ता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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