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दिग्गज क्रिकेटर का 94वें बर्थडे पर निधन, मैच के बीच मंगेतर की मौत की खबर के बाद भी मैदान पर उतरे थे

 Written By: Vanson Soral @VansonSoral
 Published : Jun 24, 2026 10:19 am IST,  Updated : Jun 24, 2026 10:40 am IST

क्रिकेट इतिहास में कुछ नाम सिर्फ अपने आंकड़ों से नहीं, बल्कि अपने साहस और जज्बे से अमर हो जाते हैं। न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज बॉब ब्लेयर भी ऐसे ही खिलाड़ियों में शामिल थे।

Bob Blair- India TV Hindi
क्रिकेट पिच Image Source : AFP

न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज बॉब ब्लेयर का इंग्लैंड में निधन हो गया। अपने 94वें जन्मदिन पर दुनिया को अलविदा कहने वाले ब्लेयर सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं थे, बल्कि साहस, संघर्ष और खेल भावना की मिसाल थे। न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने ब्लेयर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उनकी याद में इंग्लैंड के खिलाफ नॉटिंघम में खेले जाने वाले तीसरे टेस्ट के पहले दिन न्यूजीलैंड की टीम काली पट्टी बांधकर मैदान पर उतरेगी।

1952 से 1964 के बीच न्यूजीलैंड के लिए 19 टेस्ट मैच खेलने वाले ब्लेयर ने 43 विकेट अपने नाम किए। घरेलू क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड और भी शानदार रहा, जहां उन्होंने 59 फर्स्ट क्लास मैचों में 330 विकेट चटकाए। 1956-57 का सीजन उनके करियर का सबसे यादगार रहा, जब उन्होंने महज 9 की औसत से 46 विकेट हासिल किए और दो बार एक पारी में 9 विकेट लेने का कारनामा किया।

एक हादसे ने बदल दी जिंदगी

ब्लेयर को क्रिकेट इतिहास में सिर्फ उनके प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि 1953 के साउथ अफ्रीका दौरे पर दिखाए गए अद्भुत साहस के लिए याद किया जाता है। एलिस पार्क में दूसरा टेस्ट खेला जा रहा था। उसी दौरान 21 साल के ब्लेयर को मैच के दूसरे दिन सुबह यह दुखद खबर मिली कि उनकी मंगेतर नेरिसा लव क्रिसमस ईव पर हुए टांगीवाई रेल हादसे का शिकार हो गई हैं। इस दुर्घटना में कुल 151 लोगों की मौत हुई थी। अपनी निजी जिंदगी के सबसे कठिन पलों में ब्लेयर टीम होटल में शोक मना रहे थे, लेकिन जब न्यूजीलैंड की टीम मुश्किल में थी और आखिरी विकेट बाकी था, तब उन्होंने मैदान पर लौटने का फैसला किया।

जब पूरा स्टेडियम हो गया भावुक

एलिस पार्क में मौजूद 23 हजार दर्शक उस समय स्तब्ध रह गए जब ब्लेयर बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतरे। दूसरे छोर पर बर्ट सटक्लिफ थे, जो गेंद लगने के कारण अस्पताल जाकर वापस लौटे थे। दोनों खिलाड़ियों ने आखिरी विकेट के लिए 33 रन जोड़े। इस साझेदारी में एक ओवर में वर्ल्ड रिकॉर्ड 25 रन भी बने। जब ब्लेयर आउट होकर मैदान से लौटे तो उनके सम्मान में पूरा स्टेडियम खड़ा हो गया और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया गया। यह पल आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षणों में गिना जाता है।

ब्लेयर की याद में बनी टांगीवाई शील्ड

ब्लेयर और टांगीवाई रेल हादसे की कहानी ने न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका क्रिकेट को इतना प्रभावित किया कि 2024 में दोनों देशों के बीच टेस्ट सीरीज के लिए टांगीवाई शील्ड की शुरुआत की गई। यह ट्रॉफी न्यूजीलैंड की पारंपरिक लकड़ी और टांगीवाई क्षेत्र में मिलने वाले खास पत्थर से तैयार की गई थी। ब्लेयर उस ऐतिहासिक टेस्ट मैच के आखिरी जीवित न्यूजीलैंड खिलाड़ी थे।

1953 के दौरे के बाद भी ब्लेयर ने करीब एक दशक तक न्यूजीलैंड का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट 1964 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेला, जिसमें 7 विकेट लेकर करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। क्रिकेट के प्रति उनका प्रेम कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने 60 साल की उम्र के बाद भी क्रिकेट खेलना जारी रखा और 40 से अधिक सीजन तक मैदान से जुड़े रहे। खेल से संन्यास लेने के बाद उन्होंने इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे, नॉर्दर्न आयरलैंड और ऑस्ट्रेलिया में कोचिंग भी दी।

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