नई दिल्ली: भारत के जेवलिन थ्रोअर देवेन्द्र झाझडिया ने रियो पैरालिंपिक में जेवलिन थ्रो में विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया है। उन्होंने 63.97 मीटर जेवलिन फेंक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। देवेंद्र ने 2004 एथेंस खेलों में भी इसी स्पसर्द्धा में स्वर्ण पदक जीता था।
देवेंद्र झाझडिय़ा ने बचपन में करंट से हुए हादसे में हाथ खोने के बावजूद देश के लिए एथेंस 2004 पैरालिंपिक और अब 2016 रियो पैरालिंपिक में स्वर्ण पदक हासिल किया है। मार्च 2012 में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था। यह सम्मान पाने वाले वह पहले पैरालिंपियन हैं। वे मूलतः राजस्थान के चूरू जिले के रहने वाले हैं, उनका हाथ आठ साल की उम्र में पेड़ पर चढ़ते समय करंट आने से झुलस गया था।
हाथ काटने के बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ। खेलों में उनकी जबरदस्त रुचि थी। उन्होंने खेलना शुरू किया और सबसे पहले 2002 में कोरिया में हुए खेलों में गोल्ड मेडल जीता।
भारत का रियो पैरालिंपिक में यह दूसरा स्वर्ण पदक है और इन खेलों में यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी है। भारत के ही एक अन्य एथलीट रिंकू सिंह इसी स्पर्द्धा में पांचवें स्थान पर रहे। उल्लेेखनीय है कि जेवलिन में हिस्सा लेने के लिए तीन एथलीट गए थे। इनमें से तीसरे खिलाड़ी सुंदर सिंह गुर्जर से भी पदक की बड़ी उम्मीदें थीं लेकिन वे इवेंट के लिए समय पर स्टेडियम ही नहीं पहुंच पाए।