नई दिल्ली: रियो ओलम्पिक में रजत पदक जीत इतिहास रचने वाली अग्रणी भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पी. वी. सिंधु की निगाहें अब इस वर्ष होने वाले सुपरसीरीज टूर्नामेंटों और ऑल इंग्लैंड चैम्पियनशिप में खिताब जीतने पर हैं।
पहली बार ओलम्पिक में खेलते हुए फाइनल तक का सफर तय करने वाली सिंधु ने स्वीकार किया कि रियो में मिली उपलब्धि को सपना सच होने जैसा बताया और कहा कि वह इन दिनों सातवें आसमान पर हैं।
सिंधु ने मंगलवार को आईएएनएस से कहा, "वह अहसास ही अलग था..जैसे कोई सपना सच हो जाए। यह मेरा पहला ओलम्पिक था और पहली ही बार में पदक मिल जाए तो वह आपके जीवन का सबसे अनमोल क्षण हो जाता है।"
सिंधु ने कहा, "हर बार साक्षात्कार में उन्हीं बातों को दोहराना थकाऊ और उबाऊ तो है, लेकिन मैं हर पल का लुत्फ उठा रही हूं।"
ओलम्पिक की तैयारियों के बारे में सिंधु ने बताया कि उन्होंने कोच पुलेला गोपीचंद के साथ अपनी हर एक शॉट पर कड़ी मेहनत की।
टेनिस में देश को पहला ओलम्पिक रजत पदक दिलाने वाली सिंधु ने कहा, "मेरी हर प्रतिद्वंद्वी की खेलने की अपनी अगल शैली और तकनीक थी और मैं उन सभी के खिलाफ पहले कभी न कभी खेल चुकी थी। हम हर मैच से पहले रणनीति बनाते, जो मेरे पक्ष में गया।"
ओलम्पिक के फाइनल में सर्वोच्च विश्व वरीयता प्राप्त स्पेन की कैरोलीना मारिन के खिलाफ मैच को याद करते हुए सिंधु ने कहा कि पहला गेम हारने के बाद मारिन ने बेहद आक्रामकता के साथ वापसी की।
सिंधु ने कहा, "वह स्वभाव से ही आक्रामक खिलाड़ी हैं और चूंकि मैं उनके खिलाफ पहले भी खेल चुकी थी तो मुझे पता था कि वह वापसी के लिए कड़ा संघर्ष करेंगी।"
सिंधु को सोमवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश का सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार प्रदान किया।