नई दिल्ली: भारत के लिए मुक्कबेजी में परचम लहराने वाले मुक्केबाज विजेंदर सिंह ने अब एमेच्योर बॉक्सिंग को अलविदा करने का फैसला कर लिया है। खबरों के आधार पर विजेंदर अब एमेच्योर बॉक्सिंग नहीं करेंगे।
पिछले कुछ दिनों से लंदन में मौजूद बॉक्सर के ब्रिटिश प्रमोटर फ्रैंकिस वॉरेन के साथ देखे जाने की खबरों के बीच राष्ट्रीय मुक्केबाजी कोच गुरबख्श सिंह संधू के मुताबिक विजेंदर उनसे 25 जून से 12 जुलाई तक के लिए अनुमति लेकर लंदन गए हैं। लंदन में विजेंदर ट्रेनिंग के साथ ही एक लीग में भी भाग लेंगे और उसके बाद वो 13 जुलाई को भारत वापस आकर 14 जुलाई को एशियन चैंपियनशिप के पटियाला में होने वाले ट्रायल्स में भाग लेंगे।
लेकिन विजेंदर जिस तरह से अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स पर प्रोफेशनल बॉक्सर्स और प्रोफेशनल बॉक्सिंग ट्रेनर्स के साथ की फोटोज शेयर कर रहे हैं। उसे देखते हुए भारतीय बॉक्सिंग के उच्चाधिकारियों द्वारा भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के डायरेक्टर जनरल इंजेति श्रीनिवास को खराब से खराब परिस्थिति के लिए तैयार रहने को बोला गया है। कयासों के मुताबिक विजेंदर जल्द ही प्रोफेशनल बॉक्सिंग में अपने पदार्पण की घोषणा कर सकते हैं। अगर विजेंदर ऐसा करते हैं तो फिर वो भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए अयोग्य हो जाएंगे।
इस बारे में विजेंदर से पूछे जाने पर उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई बल्कि उनके ब्रिटिश प्रमोटर वॉरेन के मीडिया मैनेजर रिचर्ड मेनार्ड ने इशारों-इशारों में भिवानी के इस बॉक्सर के प्रोफेशनल बॉक्सिंग में उतरने की खबरों पर मुहर लगाई। मेनार्ड के मुताबिक सोमवार को वॉरेन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं जिसमें विजेंदर के बारे में एक बड़ी महत्वपूर्ण घोषणा होने वाली है। उनका दावा है कि एशिया के सबसे बड़े खेल सितारों में से एक के बारे में होनी वाली इस घोषणा से सारे खेल प्रेमी रोमांचित हो जाएंगे
अब देखने वाली बात यह होगी कि सोमवार को ब्रिटेन की राजधानी लंदन से भारतीय बॉक्सिंग के लिए कैसी खबर आती है, क्या विजेंदर अब तिरंगे के लिए लड़ते नहीं दिखेंगे या फिर ये महज एक पब्लिसिटी स्टंट है। क्योंकि विजेंदर के भार वर्ग में तगड़ी प्रतिस्पर्धा तो है ही साथ ही साथ वह भारत सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) के लिए भी चुने गए हैं। इस स्कीम में चुने जाने के बाद भी उन्होंने अब तक सरकार से पैसे नहीं लिए हैं और अपने खर्चे पर ही ट्रेनिंग कर रहे हैं। कयास तो ये भी लगाए जा रहे हैं कि विजेंदर सरकारी उपेक्षा से तंग आ गए हैं और साथ ही साथ प्रोफेशनल बॉक्सिंग की चकाचौंध उन्हें अपनी तरफ खींच रही है।