
घोडा गाडी चलाकर अपनी जिंदगी की गुजर बसर चलाने वाले रानी रामपाल के पिता के अनुसार रानी को पांचवीं क्लास से ही हॉकी खेलने का शोक था। शोक महंगा था और पिता की कमाई बहुत कम, बावजूद इसके रानी के पिता ने अपना पेट काटकर बेटी को हॉकी खेलने के लिए प्रोत्साहित किया।

इसका नतीजा आज उनके सामने है। रानी के पिता को ख़ुशी है कि उनकी बेटी की तपस्या रंग लायी और आज उसने देश के साथ साथ उनका नाम भी रोशन किया।
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