आखिरी मिनट में सुजीत की धमाकेदार वापसी
इतने बड़े अंतर से पीछे होने के बावजूद सुजीत ने हार नहीं मानी और मैच के आखिरी मिनट में जबरदस्त वापसी की। उन्होंने विरोधी पहलवान को लगातार चार बार पटखनी देकर आठ अंक हासिल कर लिए। इस शानदार खेल की बदौलत स्कोर 2-9 से सुधरकर 8-9 तक पहुंच गया। मैच खत्म होने में अब बहुत कम समय बचा था और ताजिकिस्तान का पहलवान अभी भी 1 अंक से आगे था। सुजीत को यह मैच जीतने के लिए बस एक आखिरी और सटीक दांव की सख्त जरूरत थी।
मैच खत्म होने के सिर्फ 10 सेकंड पहले सुजीत ने एक और जबरदस्त दांव लगाया और विरोधी पहलवान को नीचे पटक दिया। इस दांव से उन्हें 2 अंक मिले और स्कोर 10-9 हो गया। इस तरह 2-9 से बुरी तरह पिछड़ने के बाद भी सुजीत ने हार न मानते हुए 10-9 से यह मैच अपने नाम कर लिया। उनकी यह जीत यह दिखाती है कि उन्होंने मुश्किल वक्त में भी हिम्मत नहीं हारी और सही मौके पर दांव लगाकर हारी हुई बाजी पलट दी और अंत में गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
हरियाणा के रहने वाले हैं सुजीत
सुजीत का यह गोल्ड मेडल भारतीय कुश्ती के लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने 65 किलोग्राम वर्ग में देश को एशियन गेम्स का चैंपियन बनाया है। सुजीत कलकल मूल रूप से हरियाणा के चरखी दादरी के रहने वाले हैं और उनका जन्म 5 नवंबर 2002 को हुआ था। उन्हें कुश्ती खेलने की प्रेरणा अपने पिता दयानंद कलकल से मिली, जो खुद भी नेशनल लेवल के पहलवान रह चुके हैं।उन्होंने अंडर-20 और अंडर-23 स्तर पर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीते हैं। 2025 में उन्होंने सर्बिया के नोवी साद में अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल भी जीता था।
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