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सावन के पावन अवसर सीएम योगी ने लिखी पाती, जल संरक्षण, प्रकृति और सामाजिक सहभागिता का किया आह्वान

 Written By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Aug 03, 2026 06:35 am IST,  Updated : Aug 03, 2026 07:55 am IST

सीएम योगी ने सावन के पावन अवसर पर राज्य के लोगों को पाती लिख कर प्रकृति से जुड़ने का संदेश दिया है। सीएम योगी ने कहा कि सावन के महीने में ग्रामीण क्षेत्रों में धान की रोपाई के पश्चात सामूहिक श्रम से जुड़े लोगों का सहभोज साझा संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।

सीएम योगी ने लिखी पाती- India TV Hindi
सीएम योगी ने लिखी पाती Image Source : @MYOGIADITYANATH

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम पाती लिखी है। सीएम योगी ने श्रावण के पावन अवसर पर राज्य के लोगों को जल संरक्षण, प्रकृति और सामाजिक सहभागिता का किया आह्वान किया है। सीएम योगी ने अपनी पाती को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है। 

प्रकृति नवसृजन का देती है संदेश

सीएम योगी ने लिखा, 'मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों, श्रावण माह लोकमंगल, श्रम-सम्मान एवं सामूहिकता का पावन पर्व है। प्रकृति नवसृजन का संदेश देती है तथा अन्नदाता का परिश्रम हरित समृद्धि के रूप में फलीभूत होने लगता है। सनातन संस्कृति में प्रकृति का यही नवोन्मेष शिव-आराधना से जुड़कर जीवन को संयम, सेवा और समरसता का मार्ग दिखाता है।

 देवाधिदेव महादेव स्वयं प्रकृति बोध के देवता

समुद्र-मंथन के समय भगवान शिव द्वारा हलाहल का पान सृष्टि की रक्षा हेतु किए गए सर्वोच्च त्याग का प्रतीक है। उन्हें जल अर्पित करने की परंपरा उसी त्याग, कृतज्ञता और जनकल्याण के भाव की अभिव्यक्ति है। देवाधिदेव महादेव स्वयं प्रकृति बोध के देवता हैं। उनकी जटाओं में प्रवाहित गंगा, मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा, कंठ का सर्प, नंदी जी और उनके गण, हमें प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का संदेश देते हैं।

मयूर का नृत्य सृष्टि के उल्लास का उद्घोष 

ज्येष्ठ तथा आषाढ़ के ताप के उपरांत जब श्रावण की रिमझिम धरती को स्पर्श करती हैं, तो माटी की सोंधी सुगंध के साथ चारों ओर हरियाली छा जाती है। नदियां अपने पूर्ण सौष्ठव के साथ प्रवाहित होती है और मयूर का नृत्य सृष्टि के उल्लास का उद्घोष बन जाता है। 

शिवालयों में उमड़ती श्रद्धालुओं की आस्था

यही उमंग गांवों से लेकर नगरों तक जीवन में नई ऊर्जा के रूप में झलकती है। श्रावण में ग्रामीण क्षेत्रों में धान की रोपाई के पश्चात सामूहिक श्रम से जुड़े लोगों का सहभोज साझा संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। गांवों से लेकर नगरों तक शिवालयों में उमड़ती श्रद्धालुओं की आस्था सेवा, स्वच्छता और सामाजिक सहभागिता का अद्भुत वातावरण निर्मित करती है।

राज्य में लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके

पंचतत्त्वों में जल जीवन का मूल आधार माना गया है। जल संरक्षण के प्रति हमारे संकल्प का प्रमाण है कि प्रदेश में लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं। जलवायु परिवर्तन एवं अत्यधिक दोहन के कारण आज वैश्विक स्तर पर जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी आवश्यक बन गई है। 

प्रकृति से जितना लें, उतना ही उसे लौटाने का संकल्प भी

यह सुखद है कि राजधानी लखनऊ की एक आवासीय सोसाइटी ने आरओ और एयर कंडीशनर से निकलने वाले प्रतिदिन लगभग 50 हजार लीटर जल को रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली से जोड़कर भूजल पुनर्भरण में उपयोग करने की प्रेरक पहल की है। प्रकृति से जितना लें, उतना ही उसे लौटाने का संकल्प भी होना चाहिए।

स्वच्छता, जल संरक्षण का संकल्प लें

मैं आप सबसे विशेष रूप से कहना चाहता हूं कि श्रावण माह को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक सहभागिता का माह बनाने का संकल्प लें। प्रत्येक बूंद का सम्मान तथा प्रत्येक पौधे का संरक्षण करें। यही श्रावण का वास्तविक संदेश है और समृद्ध, सुरक्षित तथा विकसित उत्तर प्रदेश की आधारशिला भी है।'

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