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'ज्ञान के पंख ही बच्चों को आकाश की ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं', यूपी के छात्रों और शिक्षकों के नाम सीएम योगी की पाती

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Jun 29, 2026 08:06 am IST,  Updated : Jun 29, 2026 08:42 am IST

सीएम योगी ने सभी शिक्षकों से पढ़ाई को रोचक बनाने की अपील की है। उन्होंने लिखा कि अभिभावक अपने बच्चों का मूल्यांकन उनके नंबरों से नहीं, बल्कि उनके हौसले और लगन से करें। उन्होंने 'स्कूल चलो अभिमान' को जनआंदोलन बनाने की अपील की है।

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सीएम योगी ने स्कूल चलो अभिमान को जनआंदोलन बनाने की अपील की Image Source : X/@MYOGIADITYANATH

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी के सभी छात्रों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों के नाम पाती लिखी है। सीएम योगी ने अपनी पाती में लिखा कि उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई से 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण शुरू हो रहा है। ऐसे में शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्र स्कूल को सिर्फ अपने रूटीन का हिस्सा न समझें। छात्रों को स्कूल जाने में रुचि होनी चाहिए। खेल-कूद इसमें अहम योगदान दे सकते हैं।

सीएम योगी ने अभिभावकों से भी कहा है कि वह अभिभावक अपने बच्चों का मूल्यांकन उनके नंबरों से नहीं, बल्कि उनके हौसले और लगन से करें। स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति माता-पिता को ही सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि राज्य का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा, जब सभी बच्चे शिक्षित होंगे।

सीएम योगी की पाती

योगी आदित्यनाथ ने लिखा, "मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों, जुलाई नवीन माह का आरंभ ही नहीं, अपितु लाखों बच्चों के सपनों को विद्यालय तक पहुंचाने के नए संकल्प का समय है। उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई से 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण शुरू हो रहा है। 15 जुलाई तक चलने वाले इस अभिमान का उद्देश्य कक्षा। से 12वीं तक शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना, ड्रॉपआउट बच्चों को पुनः विद्यालय से जोड़ना तथा नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश अभियान को गति देना है।"

यूपी सीएम ने लिखा कि जीवन की सबसे अनमोल संपत्ति की जब भी चर्चा होती है, तो मानस पटल पर केवल विद्या का नाम आता है। ज्ञान के पंख ही बच्चों को आकाश की ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। विद्यालम वह पवित्र स्थान है, जहां से छात्र-छात्राओं के ज्ञान, संस्कार और जीवन-धर्म के साथ ही चरित्र एवं व्यक्तित्व निर्माण की मात्रा आरंभ होती है। यही सनातन परंपरा भी है। प्राचीन गुरुकुलों में विद्यार्थी गुरु के सानिध्य में रहकर वेद, उपनिषद, शास्त्र, विज्ञान, शिल्प, धनुर्वेद, कृषि, नीति और जीवन-मूल्यों के सांचे में ढलते थे। आज के विद्यालय उसी गुरुकुल परंपरा के आधुनिक स्वरूप हैं, जहां पुस्तकीय और प्रायोगिक ज्ञान के साथ-साथ अनुशासन और राष्ट्र‌निर्माण की भावना का विकास होता है।

बच्चे की शिक्षा से पूरा परिवार, गांव आगे बढ़ता है

योगी आदित्यनाथ ने लिखा कि जब कोई बच्चा पहली बार विद्यालय की चौखट पार करता है, तब उसके साथ पूरा परिवार, गांव और समाज आगे बढ़ता है। प्रत्येक बेटी एवं बेटे की शिक्षा और भविष्य तथा हर परिवार की प्रगति का सर्वाधिक सशक्त आधार विद्यालय ही हैं। हमारी सरकार ने इसी मशा से 'प्रोजेक्ट अलंकार शुरू किया था, जिसके अंतर्गत प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है तथा आधारभूत संरचना के उन्नयन के साथ ही गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया गया है। शिक्षा का प्रकाश पूरे प्रदेश को आलोकित करे, इसलिए हमारी सरकार 'ऑपरेशन कायाकल्प', 'मिशन प्रेरणा', 'कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना' एवं 'मिशन निपुण' जैसे अभियान चला रही है, ताकि हर स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़े। स्वस्थ मस्तिष्क के लिए स्वस्थ शरीर की आवश्यकता होती है। इसलिए स्कूलों में विविधतापूर्ण गर्म पका पकाया रुचिकर भोजन की व्यवस्था की गई है।

शिक्षकों और अभिवावकों के लिए योगी का संदेश

शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने लिखा, "प्रिय गुरुजनों, कुछ बातें मैं आपसे भी करना चाहता हूं। आप सुनिश्चित त करें कि बच्चे स्कूल को दैनिक रूटीन का हिस्सा मात्र न समझें, बल्कि विद्यालय जाने में रुचि दिखाएं। खेल-कूद आदि गतिविधियां इसके लिए बेहतर माध्यम हो सकती है।" वहीं, छात्रों के माता-पिता से उन्होंने कहा, "अभिभावक अपने बच्चों का मूल्यांकन उनके नंबरों से नहीं, बल्कि उनके हौसले और लगन से करें। स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति आपको ही सुनिश्चित करनी होगी। 3 से 6 वर्ष के बच्चों को 'बाल वाटिका' भेज सकते हैं।" अंत में उन्होंने  लिखा, "प्रदेशवासियों, 'स्कूल चलो अभिमान' को केवल सरकारी कार्यक्रम न रहने दें। इसे जनांदोलन बनाएं। यदि हमारे आसपास कोई ऐसा बच्चा हो, जो अभी तक विद्यालय नहीं पहुंच पाया, उसे स्कूल तक पहुंचाना भी हमारा कर्तव्य है। उत्तर प्रदेश का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा, जब प्रत्येक बच्चा शिक्षा से अभिसिंचित होगा। विद्या सर्वत्र पूज्यते।"

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