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अकबर महान के पाठ पर फिर विवाद, संशोधन की मांग को लेकर शिवाजी सेना ने दी चेतावनी

 Written By: India TV UP Bureau Desk
 Published : Jul 20, 2026 11:25 am IST,  Updated : Jul 20, 2026 11:25 am IST

अकबर को महान बताए जाने पर शिवाजी सेना ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। सेना का कहना है कि कक्षा सात की पुस्तक में संशोधन किया जाना चाहिए।

Akbar has been described as great in the class 7 book, to which Shivaji Sena has objected.- India TV Hindi
कक्षा सात की पुस्तक में अकबर को महान बताया गया है, इस पर शिवाजी सेना ने आपत्ति जताई है। Image Source : REPORTER INPUT

उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 7 के पाठ्यक्रम में शामिल 'अकबर महान' अध्याय को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। मुजफ्फरनगर में रविवार को शिवाजी सेना के पदाधिकारियों ने प्रेसवार्ता कर पाठ्यक्रम में संशोधन की मांग उठाते हुए चेतावनी दी। सेना की ओर से कहा गया है कि अगर सरकार ने जल्द ही इस विषय पर निर्णय नहीं लिया तो संगठन पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगा। इस बीच शिक्षा विभाग की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि ये मामला अभी तूल पकड़ सकता है।

कक्षा सात की पुस्तक में अकबर को बताया गया है महान

शिवाजी सेना के जिला अध्यक्ष अर्चित आर्य ने कहा कि कक्षा 7 की पुस्तक 'भारत की महान विभूतियां' में पाठ 12 के रूप में अकबर को "महान" बताया गया है, जबकि संगठन के अनुसार अकबर एक क्रूर शासक था। उनका कहना है कि इतिहास को तथ्यों के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए और छात्रों के सामने वही जानकारी रखी जानी चाहिए जिसे वे सही इतिहास मानते हैं। अर्चित आर्य ने अपने वक्तव्य में अकबर के शासनकाल से जुड़े कई ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अकबर की नीतियां और कार्य उसे "महान" कहे जाने के अनुरूप नहीं थे। उन्होंने महाराणा प्रताप का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि अकबर वास्तव में महान होता तो महाराणा प्रताप उसके विरुद्ध संघर्ष क्यों करते। उन्होंने सरकार से पाठ्यक्रम में संशोधन कर ऐतिहासिक तथ्यों को नए सिरे से प्रस्तुत करने की मांग की।

शिवाजी सेना ने दी पूरे उत्तर प्रदेश में विरोधी प्रदर्शन की चेतावनी

शिवाजी सेना ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं किया गया तो संगठन पहले मुजफ्फरनगर कलेक्ट्रेट पर ज्ञापन देगा और उसके बाद पूरे उत्तर प्रदेश में विरोध-प्रदर्शन शुरू करेगा। हालांकि, इस विषय पर राज्य सरकार या शिक्षा विभाग की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इतिहासकारों के बीच अकबर के शासन और विरासत को लेकर लंबे समय से अलग-अलग मत रहे हैं, जबकि स्कूलों के पाठ्यक्रम का निर्धारण संबंधित शैक्षिक संस्थाओं और विशेषज्ञ समितियों की अनुशंसा के आधार पर किया जाता है।

मुजफ्फरनगर से योगेश त्यागी की रिपोर्ट

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