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VIDEO: रावण के वेश में शिव की भक्ति, हरिद्वार से बुराड़ी तक पदयात्रा कर रहा अनोखा कांवड़िया, बताई इसकी वजह

 Published : Aug 03, 2026 01:02 pm IST,  Updated : Aug 03, 2026 01:15 pm IST

रावण के वेश में कांवड़िये को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है। वह लोगों के बीच बम-बम भोले के नारे लगा रहा है। साथ ही रावण के वेश में कांवड़िये ने ऐसा रूप धारण करने की वजह भी बताई है।

रावण के वेश में कांवड़िया- India TV Hindi
रावण के वेश में कांवड़िया Image Source : REPORTER INPUT

सावन मास के पहले सोमवार को मंदिरों में शिव भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। साथ ही कांवड़ यात्रा भी अपने चरम पर है। हरिद्वार से मुजफ्फरनगर होते हुए दिल्ली तक शिवभक्तों का सैलाब उमड़ा हुआ है। बम-बम भोले के जयघोष से पूरा हाईवे गूंज रहा है। इस साल कांवड़ियों में भक्ति के साथ-साथ अनोखी वेशभूषा का संगम भी देखने को मिल रहा है, लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा कांवड़िया सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा है जो लंकापति रावण के रूप में कांवड़ यात्रा कर रहा है।

चाल-ढाल और बोलचाल हूबहू रावण जैसी

दस मुखों वाला मुकुट, माथे पर त्रिपुंड, गले में रुद्राक्ष की मालाएं, हाथ में त्रिशूल और लंकेश जैसी भारी-भरकम गर्जना, इस कांवड़िये की वेशभूषा, चाल-ढाल और बोलचाल हूबहू रावण जैसी है। यह अनोखा शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर दिल्ली के बुराड़ी तक पैदल यात्रा कर रहा है। जब यह शिवभक्त हाईवे से गुजरता है तो लोग इसे देखने के लिए रुक जाते हैं। इसके साथ सेल्फी लेते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

मूलचंद त्यागी के रूप में हुई पहचान

इस अनोखे कांवड़िये की पहचान मूलचंद त्यागी के रूप में हुई है। जब उनसे रावण के वेश में कांवड़ लाने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि लोग रावण को केवल नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि रावण कोई राक्षस नहीं, बल्कि महान विद्वान, प्रकांड पंडित और भगवान शिव का परम भक्त था।

रावण के वेश में ही शिव को जल करेंगे अर्पित

इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'रावण ने सतयुग में कठोर तपस्या कर महादेव को प्रसन्न किया था। वह चारों वेदों का ज्ञाता था। सीता हरण के बाद भी उसने माता सीता को कभी बुरी नजर से नहीं देखा। मैं उसी शिवभक्त रावण के रूप में अपने आराध्य शिव को जल अर्पित करने जा रहा हूं।'

भक्ति सच्ची हो तो भगवान उसे करते हैं स्वीकार- रावण के वेश में कांवड़िया

मूलचंद त्यागी का कहना है कि उनका उद्देश्य रावण के चरित्र के सकारात्मक पक्ष को लोगों के सामने लाना और यह बताना है कि भक्त कैसा भी हो, यदि भक्ति सच्ची हो तो भगवान उसे अवश्य स्वीकार करते हैं।

योगेश त्यागी की रिपोर्ट

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