उत्तर प्रदेश के कानपुर के सेन पश्चिम पारा थाना क्षेत्र में 13 वर्षीय नाबालिग को सोशल मीडिया के माध्यम से अपने जाल में फंसाकर अगवा करने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस पूरे मामले में सबसे खास बात यह रही कि जिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए आरोपी ने नाबालिग से संपर्क किया था, उसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए पुलिस ने भी उसे अपने जाल में फंसाया और कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन से दबोच लिया।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, 6 जुलाई को 13 वर्षीय किशोरी घर से कोचिंग जाने की बात कहकर निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। परिजनों ने आसपास काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। अगले दिन 7 जुलाई को परिवार ने सेन पश्चिम पारा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस को घर से एक नोट मिला, जिसमें एक युवक का नाम लिखा हुआ था। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज कर मामले की गंभीरता से जांच शुरू की।
जांच में सामने आया कि आगरा निवासी कृष्णा उर्फ कृष्ण बीर सिंह ने सोशल मीडिया ऐप 'Moj' के माध्यम से किशोरी से दोस्ती की थी। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी और आरोपी ने उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ आगरा ले गया। आरोप है कि वहां उसने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। कुछ दिनों बाद आरोपी उसे कानपुर के पास छोड़कर फरार हो गया।
मामले की जांच कर रही पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल ट्रैकिंग और सोशल मीडिया गतिविधियों का विश्लेषण किया। इसी दौरान पुलिस ने आरोपी तक पहुंचने के लिए रणनीति बनाई। पुलिसकर्मियों ने 'Moj' ऐप के जरिए आरोपी से संपर्क स्थापित किया और उसे कानपुर आने के लिए तैयार किया। जैसे ही आरोपी कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पहुंचा, पहले से मौजूद पुलिस टीम ने उसे घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
थाना प्रभारी प्रदीप कुमार सिंह ने इस मामले को लेकर क्या कहा?
सेन पश्चिम पारा थाना प्रभारी प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या के प्रयास, मारपीट, छेड़खानी और बिजली चोरी जैसे मामले शामिल हैं। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की गई और आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए बच्चों और किशोरों को निशाना बनाने वाले मामलों में अभिभावकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने, अनजान लोगों से बातचीत से बचने और किसी भी संदिग्ध स्थिति की तुरंत पुलिस को सूचना देने से इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। वहीं, इस कार्रवाई में डिजिटल तकनीक और साइबर जांच की भूमिका भी अहम रही, जिसके जरिए पुलिस ने आरोपी को कानून के शिकंजे तक पहुंचाया।
कानपुर से अनुराग श्रीवास्तव की रिपोर्ट
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