1. Hindi News
  2. उत्तर प्रदेश
  3. नाम-पहचान एक, लेकिन 6 जिलों में सरकारी नौकरी कर रहा अर्पित सिंह, करोड़ों की सैलरी ली; UP में बड़ा फर्जीवाड़ा

नाम-पहचान एक, लेकिन 6 जिलों में सरकारी नौकरी कर रहा अर्पित सिंह, करोड़ों की सैलरी ली; UP में बड़ा फर्जीवाड़ा

 Published : Sep 05, 2025 05:16 pm IST,  Updated : Sep 05, 2025 05:16 pm IST

फर्रुखाबाद में स्वास्थ्य विभाग में एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया है। अर्पित सिंह नाम के शख्स का नाम, जन्मतिथि और पिता का नाम सभी रिकॉर्ड में समान पाया गया, लेकिन इसके बावजूद वह 6 अलग-अलग जिलों में एक ही समय पर नियुक्त था।

farrukhabad job scam- India TV Hindi
फर्रुखाबाद में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। Image Source : REPORTER INPUT

यूपी के फर्रुखाबाद जनपद के स्वास्थ्य विभाग से एक ऐसी खबर सामने आई जिसने न सिर्फ व्यवस्था की असली तस्वीर दिखा दी, बल्कि पूरे प्रदेश को सोचने पर मजबूर कर दिया। अर्पित सिंह, जिसका नाम पिछले 9 सालों से एक्स-रे टेक्नीशियन के पद पर दर्ज था, वह हर महीने लाखों रुपये का वेतन और सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाता रहा। लेकिन मानव संपदा पोर्टल पर जब उनका रजिस्ट्रेशन हुआ, तो राज खुला कि अर्पित सिंह नाम का कोई शख्स है ही नहीं।

क्या है पूरा मामला?

अर्पित सिंह नाम के इस शख्स का नाम, जन्मतिथि और पिता का नाम सभी रिकॉर्ड में समान पाया गया, लेकिन इसके बावजूद वह 6 अलग-अलग जिलों में एक ही समय पर नियुक्त था- फर्रुखाबाद, बांदा, बलरामपुर, बदायूं, रामपुर और शामली। यूपी के ये 6 जिले अब इस फर्जीवाड़े की वजह से चर्चा में हैं। 

4.5 करोड़ रुपये का नुकसान

वहीं, वेतन की बात करें तो एक अर्पित सिंह हर महीने 69,595 रुपये ले रहा था। एक साल में सिर्फ एक जिले से ही 8,35,140 रुपये की सैलरी ली गई। 9 सालों में केवल एक जिले से 75,16,260 रुपये का भुगतान हो चुका है। अगर 6 जिलों के अर्पित सिंहों के वेतन जोड़ें, तो लगभग 4.5 करोड़ रुपये सिर्फ छ व्यक्तियों ने विभाग से हासिल कर लिए। 

CMO ने जांच टीम बनाई

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने पूरे मामले पर तीन उप मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की जांच टीम बनाई है। जांच के बाद कार्रवाई होगी। सरकार की नीतियां, विभागीय सख्ती और निगरानी तंत्र सब पर यह सवाल खड़ा हो गया कि आखिर कैसे इतने लंबे समय तक कोई “अस्तित्वहीन” शख्स सरकारी वेतन का लाभ उठाता रहा?

मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार का कहना है कि कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन यह कार्रवाई सिर्फ नियम-कानून के दस्तावेजों तक सीमित रहेगी या फिर व्यवस्था की जड़ों तक पहुंचेगी, यह एक बड़ा सवाल है।

आखिर जिम्मेदार कौन? 

वहीं दूसरी ओर, एक ऐसा नाम जो असल में मौजूद ही नहीं है और सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर करोड़ों डकार गया। आखिर इस सबके पीछे जिम्मेदार कौन है? वे अधिकारी जिन्होंने दस्तावेजों पर सिर्फ एक "ठप्पा" लगाने को ही अपना काम समझा? या वो भ्रष्ट मानसिकता, जिसके चलते ऐसे लोग हमेशा बच निकलते हैं?

यह कहानी सिर्फ अर्पित सिंह की नहीं है। यह उस व्यवस्था की कहानी है जिसने एक "नामहीन इंसान" को 9 सालों तक जिंदा रखा और असली कर्मचारियों को चुपचाप झुककर काम करने पर मजबूर किया।

(फर्रुखाबाद से सुरजीत की रिपोर्ट)

यह भी पढ़ें-

4 लीटर पेंट करने में लगे 168 मजदूर-65 मिस्त्री, खर्च हुए 1,06,984 रुपये, MP के सरकारी स्कूलों में फर्जीवाड़ा-VIDEO

ग्वालियर PHE विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा, कर्मचारी की दो बार मौत दिखाकर 2 बेटों को मिल गई नौकरी

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। उत्तर प्रदेश से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।