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"कोविड खत्म हुआ, हिरासत में मौत का सिलसिला नहीं", गोंडा मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने की टिप्पणी

 Written By: Malaika Imam
 Published : Sep 17, 2026 07:38 am IST,  Updated : Sep 17, 2026 07:44 am IST

गोंडा में संजय कुमार सोनकर की कथित हिरासत में मौत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने आरपीएफ के दो जवानों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। दोनों पर सोनकर से हिरासत में मारपीट करने का आरोप है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट- India TV Hindi
इलाहाबाद हाई कोर्ट Image Source : PTI

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश के गोंडा में 35 वर्षीय संजय कुमार सोनकर की कथित हिरासत में मौत के मामले में आरोपी रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के दो जवानों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। न्यायमूर्ति मनीष माथुर ने आरपीएफ के दारोगा करण सिंह यादव और सिपाही अमित कुमार यादव की अलग-अलग अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

विशेष अदालत के आदेश को दी थी चुनौती

दोनों आरपीएफ कर्मियों ने गोंडा की विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) अदालत के चार अगस्त के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद दोनों अपीलों को भी खारिज कर दिया।

मालगाड़ी से तेल के डिब्बे चोरी होने के बाद जांच में आया था नाम

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 28 सितंबर 2025 को गोंडा से गुवाहाटी जा रही एक मालगाड़ी से मोतीगंज रेलवे स्टेशन क्षेत्र में सरसों के तेल के छह डिब्बे चोरी हो गए थे। आरपीएफ की जांच के दौरान गोंडा के किंकी गांव निवासी संजय कुमार सोनकर का नाम सामने आया था।

पूछताछ के लिए घर से ले जाने का आरोप

अभियोजन के अनुसार, 04 नवंबर 2025 को आरपीएफ के जवान सोनकर को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गए। उसी दिन शाम करीब साढ़े चार बजे उसे जांच के सिलसिले में उसके गांव भी लाया गया और बाद में फिर अपने साथ ले गए। अगले दिन उसके भाई को सूचना दी गई कि संजय का शव मुर्दाघर में है।

हिरासत में मारपीट से मौत का आरोप

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आरपीएफ की हिरासत में सोनकर के साथ मारपीट की गई, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। वहीं, आरोपी आरपीएफ कर्मियों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए खुद को मामले में गलत तरीके से फंसाए जाने का दावा किया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी हुई दलील

आरपीएफ कर्मियों के वकील ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सोनकर की जांघ के ऊपरी हिस्से पर चोट और दोनों घुटनों पर खरोंच के निशान मिले थे। उनका तर्क था कि इस तरह की चोटों से मौत होना संभव नहीं है।

अदालत ने कहा- सबूतों के आधार पर तय होगा मामला

पीठ ने इस दलील पर कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के निष्कर्ष आरोपों का समर्थन करते हैं या नहीं, इसका फैसला मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। अदालत ने इस स्तर पर आरोपियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

हिरासत में मौत पर हाई कोर्ट की गंभीर टिप्पणी

अदालत ने कहा कि कोविड-19 महामारी का दौर भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन हिरासत में मौत की समस्या कम होती नहीं दिख रही है। पीठ ने यह भी कहा कि हिरासत में मौत के मामलों में आम तौर पर पुलिसकर्मियों पर यह जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वे उपलब्ध साक्ष्यों के जरिए अपने ऊपर लगे गलत व्यवहार और मानव जीवन को कमतर आंकने के आरोपों को गलत साबित करें।

दोनों आरपीएफ कर्मियों को फिलहाल राहत नहीं

हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद दारोगा करण सिंह यादव और सिपाही अमित कुमार यादव को अग्रिम जमानत नहीं मिली है। मामले में हिरासत के दौरान सोनकर की मौत और उसकी परिस्थितियों से जुड़े आरोपों का अंतिम निर्धारण आगे की न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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