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अलंकार अग्निहोत्री प्रोफाइल: 10 साल की उम्र में पिता को खोया, IIT से की पढ़ाई, पहले प्रयास में बने SDM

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Jan 27, 2026 02:55 pm IST,  Updated : Jan 27, 2026 03:00 pm IST

उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री चर्चा में हैं। उन्होंने शंकराचार्य के अपमान की वजह से नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि सरकार ने उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया बल्कि उन्हें निलंबित कर दिया।

Alankar Agnihotri- India TV Hindi
अलंकार अग्निहोत्री Image Source : ANI

कानपुर: उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री की जीवन कहानी चुनौतियों और दृढ़ संकल्प से भरी हुई है। मूल रूप से कानपुर नगर के निवासी अलंकार ने कम उम्र में ही बड़े कष्ट सहे।

साढ़े दस साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार की सारी जिम्मेदारियां सबसे बड़े बेटे होने के नाते उनके कंधों पर आ गईं। उनके परिवार में चार भाई और एक बहन हैं, और उन्होंने इन सबकी पढ़ाई-लिखाई और भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी उठाई।

कठिन परिस्थितियों के बावजूद अलंकार ने पढ़ाई जारी रखी। वर्ष 1998 में उन्होंने यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश स्तर पर 21वां स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने आईआईटी-बीएचयू से बीटेक की डिग्री प्राप्त की। सिविल सेवा में जाने की इच्छा बचपन से ही थी, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने पहले निजी क्षेत्र में नौकरी को प्राथमिकता दी। उन्होंने आईटी सेक्टर में कंसल्टेंसी की नौकरी की और करीब एक दशक तक वहां काम किया। इस दौरान उन्होंने परिवार को आर्थिक सहारा दिया और छोटे भाई-बहनों को आत्मनिर्भर बनने में मदद की।

प्राइवेट जॉब छोड़कर की पीसीएस परीक्षा की तैयारी

जब परिवार की स्थिति स्थिर हुई और भाई-बहन स्वावलंबी हो गए, तब अलंकार ने प्रशासनिक सेवा की तैयारी का फैसला लिया। उन्होंने प्राइवेट जॉब छोड़ दी और यूपीपीसीएस परीक्षा की तैयारी शुरू की। आर्थिक जोखिम से बचने के लिए उन्होंने एक वर्ष की सैलरी पहले से बचा ली थी, ताकि तैयारी के दौरान परिवार पर कोई बोझ न पड़े। 

15वीं रैंक हासिल करके बने थे एसडीएम

अलंकार की मेहनत रंग लाई और उन्होंने पहले ही प्रयास में यूपी पीसीएस परीक्षा पास कर ली। उन्होंने 15वीं रैंक हासिल की और डिप्टी कलेक्टर (एसडीएम) बन गए। 2019 बैच के इस अधिकारी ने लखनऊ, उन्नाव और बलरामपुर में एसडीएम के पद पर कार्य किया, जहां वे स्पष्ट निर्णय लेने और अनुशासित कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।

अलंकार का परिवार कानपुर में नौबस्ता इलाके के पोर्श कॉलोनी में रहता है, जहां उनके घर के बाहर "बजरंगबली निवास" लिखा हुआ है। यह घर उनका बचपन का है, जहां वे बड़े हुए और परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं। पत्रकारों के पहुंचने पर परिवार ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन पड़ोसियों ने बताया कि अलंकार शुरू से ही मेहनती, शांत और अपने में रहने वाले व्यक्ति रहे हैं। परिवार का कोई राजनीतिक कनेक्शन या झुकाव नहीं रहा है। अलंकार ने उत्तर प्रदेश में चल रही परिस्थितियों, खासकर नए UGC नियमों और अन्य मुद्दों को लेकर अपना फैसला लिया। (रिपोर्ट: अनुराग श्रीवास्तव)

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