लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को बनाने वाली कपंनी को तीन साल के लिए बैन कर दिया गया है। PNC Infratech और उसकी सहायक कंपनी अवध एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड को तीन 3 वर्ष की अवधि के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), एनएचएआई और नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) की किसी भी परियोजना में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 18 किमी तक बंद
करीब 4200 करोड़ से बने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन दो महीने पहले 13 जुलाई को हुआ था। अब बंथरा के पास बनी में एलिवेटिड रोड का हिस्सा धंस गया है और मलबा नीचे आ गया है। इसके बाद 18 किमी तक इसे बंद बन दिया गया है। एलिवेटिड रोड की मरम्मत की जा रही है। एलिवेटिड रोड के नीचे अब नई सरिया का जाल लगाकर मरम्मत का काम चल रहा है। मौके पर मरम्मत में लगे लोग बता रहे हैं कि यहां सड़क टूटने की वजह एक ट्रक है। ट्रक में मोरंग थी और ट्रक ने एलिवेटेड रोड पर गाड़ी में जैक लगा दिया जिससे सड़क में दरार आ गई। अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या एलिवेटिड रोड का लोड टेस्ट नही हुआ था और क्या सीमेंट और दूसरी निर्माण सामग्री घटिया क्वालिटी की लगाई गई है? अब NHAI पूरी18 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड की जांच कर रही है।
सड़क धंसने, दरार आने और टूटने का सिलसिला जारी
कानपुर से लखनऊ आ रहे ट्रैफिक को अब एक्सप्रेसवे अब डाइवर्ट करके पुरानी सड़क पर भेजा जा रहा है। एक्सप्रेसवे के सफ़र में पहली बार दिक्कत नही आ रही। उद्घाटन के 13 दिन बाद ही 26 जुलाई को एक्सप्रेस वे पर सड़क धंस गई थी। सड़क धंसने, दरार आने और टूटने का सिलसिला अभी जारी है। लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे 63 किलोमीटर लंबा है और हालात ये है कि आज भी जगह जगह यहां मरम्मत चल रही है। कई जगह पुल के नीचे की ढाल टूट गई है जिसे मरम्मत करके ठीक किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे पर सफ़र करने पर करीब हर 500 मीटर पर सड़क की मरम्मत दिख रही है। जहां सड़क टूटने, धंसने या दरार पड़ने से नई सड़क बनाई गई है। ऐसी सड़कों के पैच दिख रहे है।
एनएचएआई ने कई जिम्मेदारी अधिकारियों पर लिया एक्शन
एनएचएआई ने परियोजना की निगरानी एवं पर्यवेक्षण में हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है। निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, स्वतंत्र अभियंता के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटा दिया है और उन्हें दो साल के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), एनएचएआई और नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) के किसी भी परियोजना में भाग लेने पर बैन लगा दिया है।
इसके अलावा एनएचएआई ने वर्तमान परियोजना निदेशक को उनके मूल विभाग में वापस भेजने के साथ ही पूर्व परियोजना निदेशक, जिनके कार्यकाल के दौरान परियोजना का निर्माण हुआ के खिलाफ लापरवाही के बारे में आरोप-पत्र जारी किया गया। वहीं, समाजवादी पार्टी का आरोप है कि एक्सप्रेस वे बनाने वाली कंपनी बीजेपी के राज्यसभा सांसद के रिश्तेदारों की है।
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