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बेटे-बहू ने मां को घर से निकाला, आंसू देख डीएम ने बुजुर्ग के बेटे को बुलाया, फिर जो किया हर जगह होने लगी तारीफ

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Oct 29, 2025 11:57 am IST,  Updated : Oct 29, 2025 12:03 pm IST

कानपुर में एक बहू-बेटे ने अपनी बुजुर्ग मां को घर से बाहर निकाल दिया। डीएम ने बुजुर्ग के बेटे को जमकर फटकार लगाई। स्थानीय लोग डीएम जितेंद्र कुमार सिंह की तारीफ कर रहे हैं कि उन्होंने न केवल कानूनी मदद की, बल्कि पारिवारिक सुलह कराकर एक बुजुर्ग की जिंदगी बचा ली।

बुजुर्ग मां के सामने बेटे को फटकार लगाते डीएम- India TV Hindi
बुजुर्ग मां के सामने बेटे को फटकार लगाते डीएम Image Source : REPORTER

कानपुर: रिश्तों की डोर कितनी नाजुक होती है, यह कहावत तो हम सबने सुनी है, लेकिन जब यह डोर पलों में टूटती है और फिर दिल से दिल तक की कोशिश से घंटों में जुड़ जाती है, तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं लगता। कानपुर में भी सोमवार को कुछ ऐसा ही भावुक नजारा देखने को मिला जब कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के जनता दरबार में एक 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला पूनम शर्मा रोते-बिलखते पहुंचीं। उनकी आंखों से बहते आंसू और कांपती आवाज ने पूरे ऑफिस को स्तब्ध कर दिया। डीएम साहब ने न केवल उनकी फरियाद सुनी, बल्कि गार्जियन की तरह हस्तक्षेप कर मां-बेटे के बीच टूटे रिश्ते को महज दो घंटे में जोड़ दिया। इस घटना ने एक बार फ़िर से न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि रिश्तों को बचाने के लिए थोड़ी सी मानवीयता काफी होती है।

बुजुर्ग को रोते देख पसीजा डीएम का दिल

सोमवार की सुबह कानपुर के कलेक्ट्रेट में जनता दरबार चल रहा था। फरियादी अपनी-अपनी समस्याओं को लेकर लाइन में लगे थे। तभी पूनम शर्मा, जो चलने-फिरने में भी असमर्थ लग रही थीं, रोते हुए डीएम के सामने पहुंचीं। उन्होंने फफकते हुए बताया, "साहब, मेरे बेटे और बहू ने मेरा मोबाइल, पेंशन की पासबुक, आधार कार्ड सब छीन लिया है। 25 अक्टूबर को मुझे घर से निकाल दिया। पिछले दो दिनों से मैं इधर-उधर भटक रही हूं। न खाने को कुछ, न रहने की जगह।" बुजुर्ग महिला की यह दर्दभरी दास्तां सुनकर डीएम जितेंद्र कुमार सिंह का दिल पसीज गया। वे तुरंत उठे, महिला को अपनी कुर्सी पर बैठाया, पानी पिलवाया और गर्म चाय मंगवाकर दी। ऑफिस में मौजूद अन्य अधिकारी और फरियादी भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए।

डीएम ने मां के सामने बेटे को लगाई फटकार

डीएम साहब ने बिना देर किए तुरंत कार्रवाई शुरू की। उन्होंने महिला से बेटे का नंबर लिया और फोन मिलाया। बेटे को फौरन ऑफिस बुलावा भेजा गया। जब बेटा आया, तो डीएम ने पहले तो मां के सामने ही उसे जमकर फटकार लगाई। "तुम्हें शर्म नहीं आती? अपनी मां को घर से निकाल दिया? यह पेंशन उनकी मेहनत की कमाई है, तुम्हारा हक नहीं!" डीएम की सख्त आवाज से बेटा सिर झुकाए खड़ा रहा। इसके बाद डीएम ने मां-बेटे को एक किनारे बैठाया और दोनों की शिकायतें धैर्यपूर्वक सुनीं। महिला ने बताया कि बेटा-बहू आए दिन झगड़ा करते हैं और अब उन्हें बोझ समझते हैं। बेटे ने अपनी तरफ से कहा कि मां की जिद और घरेलू विवादों से तंग आ गया था।

डीएम की संवेदनशीलता से जुड़ा मां-बेटे का टूटा रिश्ता

डीएम ने गार्जियन की भूमिका निभाते हुए बेटे को लंबी नसीहत दी। उन्होंने कहा, "मां-बेटे का रिश्ता दुनिया का सबसे पवित्र बंधन है। यह तिनकों की तरह बिखर सकता है, लेकिन आंसुओं और समझदारी से फिर जुड़ भी जाता है। तुम्हारी मां ने तुम्हें पाला है, अब तुम्हारी बारी है उनकी देखभाल करने की।" करीब दो घंटे की काउंसलिंग के बाद चमत्कार हो गया। बेटा भावुक होकर मां के पैरों पर गिर पड़ा और माफी मांगी। मां ने भी आंसुओं के बीच बेटे को गले लगा लिया। ऑफिस में मौजूद डीएम, अन्य अधिकारी और फरियादी तालियां बजाकर इस पुनर्मिलन के गवाह बने। बेटा अपनी मां का हाथ थामे घर ले गया। जाते-जाते बुजुर्ग महिला ने डीएम को आशीर्वाद देते हुए कहा, "बेटा, तुम मेरे दूसरे बेटे जैसे हो। भगवान तुम्हें खुश रखे।"

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डीएम ने फोन कर बुजुर्ग मां से हाल-चाल पूछा

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। मंगलवार को डीएम ने खुद फोन कर पूनम शर्मा से हालचाल पूछा। "आंटी, घर में सब ठीक तो है? बेटा ठीक से व्यवहार कर रहा है न?" महिला की आवाज में खुशी और आंसू दोनों थे। उन्होंने कहा, "नहीं-नहीं साहब, सब ठीक है। जिस मां के पास कानपुर डीएम जैसा बेटा हो, उसकी कोई परेशानी नहीं हो सकती।" डीएम की यह फॉलो-अप कॉल ने साबित कर दिया कि प्रशासन सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि इंसानी रिश्तों की देखभाल भी करता है।

डीएम की हर जगह हो रही तारीफ

यह घटना कानपुर में चर्चा का विषय बन गई है। स्थानीय लोग डीएम जितेंद्र कुमार सिंह की तारीफ कर रहे हैं कि उन्होंने न केवल कानूनी मदद की, बल्कि पारिवारिक सुलह कराकर एक बुजुर्ग की जिंदगी बचा ली। समाजशास्त्री मानते हैं कि आज के दौर में जहां बुजुर्गों को अक्सर बोझ समझा जाता है, ऐसे अधिकारी रिश्तों की मिसाल कायम कर रहे हैं। पूनम शर्मा की कहानी बताती है कि गैर-संवेदनशीलता से टूटे रिश्ते को जिम्मेदारी और मानवीयता से दो घंटे में जोड़ा जा सकता है।

डीएम ऑफिस अब न केवल शिकायतों का स्थान, बल्कि रिश्तों की मरम्मत की जगह भी बन गया है। बताते चले कि जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह का ये कोई पहला कारनामा नही है, इससे पहले ही कानपुर आने के बाद डीएम द्वारा कई मामलों को इसी अनोखेपन से निपटाया गया है । कभी बुजुर्ग को अपने पैसे से कानो की मशीन ख़रीदकर देने, कभी अपनी सरकारी गाड़ी से बुजुर्गों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने, कभी विद्यार्थियों के साथ विद्यालय में बर्तन धोने, तो कभी ताबड़तोड़ एक्शन लेकर जनता हित के मामले ऐसे सैकड़ो मामले है जो कानपुर जिलाधिकारी को औरों से अलग बनाते है ।

रिपोर्ट: अनुराग श्रीवास्तव, कानपुर

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