उत्तर प्रदेश की पीलीभीत विधानसभा सीट यूपी की हॉट सीटों में से एक है। पीलीभीत विधानसभा सीट का नंबर 127 है और यह पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। पिछले 8 आम विधानसभा चुनावों और एक उपचुनाव को देखें तो बीजेपी पीलीभीत में 6 बार और सपा 3 बार जीती है। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में बीजेपी जहां जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में है तो वहीं, सपा 2022 के विधानसभा चुनाव में मिली करीबी हार का बदला लेने की कोशिश में जुटी हुई है। पीलीभीत विधानसभा के सामाजिक समीकरण देखें तो यहां मुस्लिम, कुर्मी, अन्य OBC समूह और SC वर्ग के मतदाता निर्णायक संख्या में हैं। आइए समझते हैं कि पीलीभीत विधानसभा सीट का 1991 से लेकर 2022 तक चुनावी इतिहास क्या रहा है और UP Assembly Election 2027 में पीलीभीत सीट पर क्या सियासी समीकरण हो सकते हैं।
अयोध्या में गोलीकांड के बाद हुए चुनाव में BJP के खाते में पहली बार आई पीलीभीत
1991 के पीलीभीत के विधानसभा चुनाव की बात करें तो अयोध्या में गोलीकांड के बाद यह चुनाव बीजेपी के पक्ष में रहा था। बीजेपी के बी.के. गुप्ता ने मौजूदा विधायक और कांग्रेस कैंडिडेट रियाज अहमद को 19 हजार 978 वोटों के अंतर से हरा दिया था। बी.के. गुप्ता को 47,617 वोट मिले थे, जबकि रियाज अहमद 27,639 वोटों पर सिमट गए थे। इस चुनाव में जनता पार्टी तीसरे नंबर पर रही थी और उसके प्रत्याशी धीरेंद्र सहाय 11,629 वोट हासिल कर पाए थे।
1993 में बीजेपी के बी.के. गुप्ता लगातार दूसरी बार जीते
पीलीभीत के 1993 के चुनाव में भी बीजेपी के बी.के. गुप्ता विजयी हुए। इस चुनाव में उनके सामने एक बार फिर रियाज अहमद थे लेकिन वह जनता पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में थे। यह चुनाव बी.के. गुप्ता ने 17 हजार 871 वोटों के अंतर से जीत लिया था। बी.के. गुप्ता को 45,682 वोट मिले थे, जबकि रियाज अहमद 27,811 वोट ही हासिल कर पाए थे। वहीं, सपा के हारून अहमद और कांग्रेस के माधव प्रसाद क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रहे थे। हारून अहमद को 19,876 वोट और माधव प्रसाद को 11 हजार 570 मत मिले थे।
1996 में प्रत्याशी बदलने के बावजूद BJP ने लगाई जीत की हैट्रिक
1996 के पीलीभीत विधानसभा के चुनाव में बीजेपी ने बी.के. प्रसाद का टिकट काटकर राज राय सिंह को चुनावी मैदान में उतारा। इससे नाराज बी.के. प्रसाद ने निर्दलीय ही पर्चा भर दिया था। इस चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पार्टी SJP(R) के हारून अहमद और जनता दल के मोहम्मद जकी भी टक्कर दे रहे थे। वोटों की गिनती हुई तो जीत एक बार फिर बीजेपी की हुई। राज राय सिंह ने SJP(R) के हारून अहमद को 10,606 वोटों के अंतर से मात दे दी। राज राय सिंह को 37,875 वोट मिले, जबकि हारून अहमद को 27,269 वोटों से संतोष करना पड़ा। जनता दल के मोहम्मद जकी को 22,652 वोट, बीएसपी के गोवर्धन को 19,797 मत और निर्दलीय उम्मीदवार बी.के. गुप्ता को 16,355 वोट मिले।
2000 के उपचुनाव में लगातार चौथी बार जीती BJP
हालांकि, राज राय सिंह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं और उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद, 2000 में पीलीभीत में उपचुनाव हुआ और इस बार बीजेपी के टिकट पर फिर से मैदान में उतरे बी.के. गुप्ता। ये चुनाव बी.के. गुप्ता ने 40,203 वोट पाकर जीता और सपा के एजाज अहमद को 14,432 वोटों के अंतर से हरा दिया। एजाज अहमद 25,771 मत ही हासिल कर पाए।
2002 में रियाज अहमद ने बाजी पलटकर सपा को दिलाई पहली जीत
ECI के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2002 के चुनाव में एक बार फिर मुकाबला सपा के रियाज अहमद और बीजेपी के बी.के. गुप्ता के बीच हुआ। इस चुनाव में रियाज ने बाजी पलट दी और बीजेपी प्रत्याशी को 9,971 वोटों से पटखनी दे दी। रियाज अहमद को 35,700 वोट मिले, जबकि बी.के. गुप्ता 25,729 वोट ही पा सके। इस चुनाव में राज राय सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं और उन्हें 17,805 वोट मिले थे। बीएसपी के मोहम्मद जकी 5वें नंबर पर रहे थे, उन्हें 7,941 वोट मिले थे।
2007 में लगातार दूसरी बार जीते रियाज अहमद
2007 में फिर से समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट और मौजूदा विधायक रियाज अहमद और बीजेपी के बी.के. गुप्ता ने एक-दूसरे को टक्कर दी। रियाज अहमद को 50,947 वोट मिले, जबकि बी.के. गुप्ता 46,912 वोटों पर ही सिमट गए। इस करीबी मुकाबले में सपा ने महज 4,035 वोटों के अंतर से बीजेपी को हरा दिया। 1991 से 2022 तक हुए सभी चुनावों में ये सबसे कम वोटों के अंतर की जीत थी। पूरे यूपी में BSP की लहर के बावजूद यहां पार्टी के प्रत्याशी हेमराज वर्मा तीसरे नंबर पर रहे थे और 24,444 मत ही पा सके थे।
| वर्ष | विजेता | पार्टी | वोट | रनर-अप | पार्टी | वोट | अंतर |
| 1991 | बी.के. गुप्ता | BJP | 47,617 | रियाज अहमद | INC | 27,639 | 19,978 |
| 1993 | बी.के. गुप्ता | BJP | 45,682 | रियाज अहमद | JP | 27,811 | 17,871 |
| 1996 | राज राय सिंह | BJP | 37,875 | हारून अहमद | SJP(R) | 27,269 | 10,606 |
| 2000 उपचुनाव | बी.के. गुप्ता | BJP | 40,203 | एजाज अहमद | SP | 25,771 | 14,432 |
| 2002 | रियाज अहमद | SP | 35,700 | बी.के. गुप्ता | BJP | 25,729 | 9,971 |
| 2007 | रियाज अहमद | SP | 50,947 | बी.के. गुप्ता | BJP | 46,912 | 4,035 |
| 2012 | रियाज अहमद | SP | 61,578 | संजय सिंह गंगवार | BSP | 57,343 | 4,235 |
| 2017 | संजय सिंह गंगवार | BJP | 1,36,486 | रियाज अहमद | SP | 93,130 | 43,356 |
| 2022 | संजय सिंह गंगवार | BJP | 1,25,506 | शैलेंद्र सिंह गंगवार | SP | 1,18,536 | 6,970 |
(सोर्स- Election Commission Of India)
2012 में सपा ने पीलीभीत सीट पर लगाई जीत की हैट्रिक
2012 के विधानसभा चुनाव में सपा को पहली बार उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत मिला था। पूरे यूपी में सपा की लहर थी। इसके बावजूद पीलीभीत सीट पर मुकाबला कड़ा रहा था। सपा के रियाज अहमद, बीएसपी के संजय सिंह गंगवार से महज 4,235 वोटों के करीबी अंतर से जीत हासिल कर पाए थे। रिजाय अहमद को 61,578 वोट मिले थे, जबकि संजय सिंह गंगवार 57,343 वोट हासिल कर पाए थे। इस चुनाव में बीजेपी तीसरे नंबर पर खिसक गई थी और उसके उम्मीदवार सत्यपाल को 47,771 वोट मिले थे। बी.के. गुप्ता ने इस बार निर्दलीय चुनाव लड़ा था और 12,422 वोट पाकर 5वें स्थान पर रहे थे।
2017 में संजय सिंह गंगवार BJP के टिकट पर रिकॉर्ड अंतर से जीते
2017 के चुनाव में बीजेपी ने अपना प्रत्याशी बदल दिया। इस बार उसने 2012 के बीएसपी उम्मीदवार संजय सिंह गंगवार को उम्मीदवार बनाया और उन्होंने 1,36,486 वोट हासिल करके रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की। संजय सिंह गंगवार ने सपा के रियाज अहमद को 43,356 वोटों के बड़े अंतर से मात दे दी। रियाज अहमद 93,130 वोट ही हासिल कर सके। वोटों के लिहाज से यह पिछले 3 दशकों की सबसे बड़ी जीत थी। इस चुनाव में अरशद खान BSP के टिकट पर चुनाव मैदान में थे और उन्हें महज 14,532 वोटों से संतोष करना पड़ा था।
2022 में कांटे के मुकाबले में BJP ने बचा ली पीलीभीत सीट
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के संजय सिंह गंगवार ने करीबी मुकाबले में पीलीभीत सीट दोबारा जीत ली। इस बार उनका मुकाबला सपा के शैलेंद्र सिंह गंगवार से था। संजय सिंह गंगवार को 1,25,506 वोट मिले, जबकि शैलेंद्र सिंह गंगवार 1,18,536 वोट हासिल कर पाए। जीत-हार 6,970 वोटों के अंतर से तय हुई थी। बीएसपी का प्रदर्शन पिछली बार के मुकाबले और भी खराब हो गया और उसके प्रत्याशी शाने अली 12,099 वोट ही पा सके। कांग्रेस उम्मीदवार शकील अहमद नोटा से भी कम वोट पाए। नोटा को 1,188 वोट मिले, जबकि शकील अहमद 1,042 वोटों पर सिमट गए।
पीलीभीत विधानसभा चुनाव 2027 का सियासी समीकरण
1991 से 2022 तक हुए 8 आम विधानसभा चुनावों और एक उपचुनाव में बीजेपी ने 6 और सपा ने 3 बार जीत हासिल की। इस दौरान, BSP और कांग्रेस को एक बार भी जीत नहीं मिली। BJP 1991, 1993 और 1996 के आम चुनाव और 2000 के उपचुनाव में लगातार 4 बार विजयी हुई। इसके बाद सपा के रियाज अहमद 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीन बार जीते। वहीं, 2017 में बीजेपी ने फिर से वापसी की। इसके बाद, पिछला यानी 2022 का विधानसभा चुनाव भी बीजेपी के संजय सिंह गंगवार ने करीबी अंतर से जीत लिया।
2027 के सियासी समीकरण को देखें तो पीलीभीत सीट पर बीजेपी के सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती है। पीलीभीत में पिछले तीन दशकों में बीजेपी और सपा की कड़ी टक्कर रही है। हालांकि, ज्यादातर बीजेपी का पलड़ा ही भारी रहा है। 2027 के चुनाव में पीलीभीत में एक पाले में बीजेपी होगी और दूसरी तरफ सपा और कांग्रेस एक साथ दिखाई दे सकते हैं। चुनाव में कैंडिडेट के चयन, जातियों की गोलबंदी और बूथों पर माइक्रो मैनेजमेंट बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
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