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पड़ोसी के घर में कौन आ-जा रहा है... ये अब CCTV कैमरे नहीं देख पाएंगे! हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

 Written By: Khushbu Rawal
 Published : Nov 02, 2026 11:46 pm IST,  Updated : Nov 02, 2026 11:46 pm IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि कोई भी व्यक्ति इस तरह से सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा सकता जिससे पड़ोसी की प्राइवेसी का हनन हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि CCTV कैमरे का इस्तेमाल पड़ोसी की निजता में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं किया जा सकता।

पड़ोसी की निजता छीनने...- India TV Hindi
पड़ोसी की निजता छीनने वाले CCTV कैमरे अब नहीं चलेंगे (प्रतीकात्मक तस्वीर) Image Source : PEXELS

प्रयागराज: घर में सीसीटीवी कैमरा लगाना आजकल जरूरत बन गया है। ये कैमरे आपके पीछे से घरों को सुरक्षित रखते हैं। इनके जरिए घर पर आने-जाने वाले लोगों की मूवमेंट देखी जा सकती है। लेकिन कई बार ये सीसीटीवी कैमरा आपके लिए मुसीबत भी खड़ी कर सकते हैं और इसकी वजह है पड़ोसी की निजता (प्राइवेसी) का हनन। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नागरिकों के निजी जीवन और प्राइवेसी से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया है।

'पड़ोसी की प्राइवेसी में दखल नहीं'

कोर्ट ने अपने एक आदेश में साफ कहा है कि निजी सीसीटीवी कैमरे इस तरह नहीं लगाए जा सकते कि उनसे पड़ोसी की निजता का हनन हो। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि कानूनन किसी भी व्यक्ति को अपने पड़ोसी की प्राइवेसी में दखलंदाजी करने की बिल्कुल भी अनुमति नहीं दी जा सकती। जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने याचिकाकर्ता योगेंद्र मौर्य के पड़ोसी के सीसीटीवी कैमरे लगाने के तरीके को चुनौती देने वाली रिट याचिका का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता योगेंद्र मौर्य ने आरोप लगाया था कि उनके पड़ोसी ने CCTV कैमरे इस तरह लगाए हैं कि उनके घर में आने-जाने के रास्ते कैमरों की निगरानी में हैं जिससे यह पता चलता है कि उनके घर कौन आ-जा रहा है और इस तरह उनकी निजता का हनन होता है।

मौर्य का मुख्य तर्क यह था कि पड़ोसी का सीसीटीवी कैमरा उनके घर के आने-जाने के मुख्य रास्ते पर फोकस करता है। इस वजह से उनके घर आने-माने वाले मेहमानों और परिवार के सदस्यों की प्राइवेसी में गंभीर रूप से हस्तक्षेप हो रहा था, जिसे उन्होंने सीधे तौर पर निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया।

इस पर बेंच ने 26 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा, ''हमारे विचार से कोई भी निजी सीसीटीवी कैमरा इस तरह नहीं लगाया जा सकता कि उससे पड़ोसी की निजता का हनन हो।'' 

1 महीने के भीतर फैसला करने का निर्देश

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सीसीटीवी कैमरे हटाने या उनकी जगह बदलने का सीधे निर्देश देने के बजाय याचिकाकर्ता से जिलाधिकारी के समक्ष आवेदन देने को कहा और जिलाधिकारी को आवेदन मिलने के एक महीने के भीतर उस पर फैसला करने का निर्देश दिया।

(इनपुट- PTI)

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