अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में जबरदस्त सियासत शुरु हो गई है। समाजवादी पार्टी ने पहले चढ़ावा चोरी होने का आरोप लगाया और एक्शन की मांग की। इसके बाद राम मंदिर समिति के कहने पर सरकार ने जांच के लिए टीम भी बना दी है। वहीं SIT की टीम अब से थोड़ी देर पहले ही अयोध्या के राम मंदिर पहुंच भी चुकी है। अगले 15 दिन में ये SIT अपनी फाइनल रिपोर्ट देगी, जिसके बाद साफ हो जाएगा कि चढ़ावा चोरी हुआ या नहीं। अगर राम मंदिर का चढ़ावा चोरी हुआ तो कितना और कब से हुआ। तमाम सवालों के जवाब तलाशने का काम शुरु हो चुका है। इस SIT जांच के दायरे में वो 50 लोग आएंगे जो चढ़ावे गिनने का काम करते हैं। अब तक 5 कर्मचारियों के पास से करीब 2 करोड़ रुपये कैश बरामद भी हो चुके हैं।
अनुकल्प और लवकुश पर आरोप
दरअसल, अयोध्या से करीब 45 किलोमीटर दूर मिल्कीपुर के बंसावा ईंट गांव में अनुकल्प का घर है। अनुकल्प अभी अपने अयोध्या के घर में रहते हैं। अनुकल्प भी राम मंदिर में काम करते हैं और उन पर भी चढ़ावा चोरी के आरोप लग रहे हैं। अनुकल्प ने ही कुछ महीने पहले अपने बहनोई लवकुश को राम मंदिर में नौकरी दिलाई थी। कहा जा रहा है कि लवकुश के घर से 10 लाख रुपये कैश बरामद किए गए हैं। गांव में अनुकल्प का घर सबसे अलग दिख रहा है। अभी कुछ दिन पहले अनुकल्प ने गांव में भागवत भी कराई है। हालांकि गांव वाले कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं, लेकिन दबी जुबान में कह रहे हैं कि हाल के दिनों में अनुकल्प के पास बहुत पैसा आ गया है।
जांच के लिए बनाई गई 3 सदस्यीय SIT
श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर, उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित घोटाले की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है। SIT में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर IAS विजय विश्वास पंत, IG (रेंज) IPS किरण एस और वित्त विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी नील रतन शामिल हैं। कमेटी को जल्द से जल्द अपनी शुरुआती और अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। टीम की अगुवाई 2004 बैच के आईएएस अफसर विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। टीम के सदस्य किरण एस 2008 बैच के आईपीएस हैं और सीबीआई और इंटरपोल में रह चुके हैं, जबकि नील रतन कुमार को फाइनेंस और एकाउंट्स कैडर में 36 साल से ज़्यादा का अनुभव है।
संदिग्धों से पूछताछ करेगी SIT
SIT मन्दिर में सभी तरह के दान, ट्रस्ट के बैंक खातों, ऑडिट रिपोर्ट्स की जांच करेगी। टीम देखेगी कि दान पात्रों से कैसे कैश निकाला जा रहा है, कैसे गिना जा रहा है और कैसे बैंक पहुचाया जा रहा है। इसके अलावा SIT संदिग्धों से पूछताछ करेगी और ट्रस्ट के पदाधिकारियों के भी बयान लेगी। SIT मन्दिर के पूर्व कर्मचारी महिपाल सिंह से भी पूछताछ कर सकती है। महिपाल ने दान के गबन को लेकर गम्भीर आरोप लगाए हैं। SIT देखेगी कि सीसीटीवी, कड़ी सुरक्षा और निगरानी के बाद भक्तों का दान चोरी हुआ तो आखिर कैसे हुआ?
टीम ने राम मंदिर में समझी काउंटिंग की प्रक्रिया
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की टीम मंदिर परिसर में जांच कर रही है। ट्रस्ट कार्यालय में जांच की जा रही है। काउंटिंग कक्ष और उसमें लगे कर्मियों की जानकारी भी टीम ने ली है। बैंक के जो कर्मचारी काउंटिंग करने और कैश लेने आते हैं और जो कैश डेस्क पर रहते हैं उनकी डिटेल मांगी गई है। ट्रस्ट कार्यालय के बाहर सीसीटीवी फुटेज को भी देखा गया है। ट्रस्ट के कर्मचारी जिनकी निगरानी में ये काउंटिंग होती है उनसे भी टीम ने बातचीत कर प्रक्रिया समझी है। सूत्रों के मुताबिक, गोपाल राव जिनपर गम्भीर आरोप हैं उनसे एसआईटी ने बात की है। ट्रस्टी गोपाल राव ने जांच टीम को चढ़ावा और दान की पूरी प्रोसेस जो ट्रस्ट अपनाता है वो बताई है।
42 लोगों से की गई पूछताछ
राम मंदिर परिसर में लगभग 42 लोगों से पूछताछ की गई। राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी समेत बैंक के भी कुछ कर्मियों से पूछताछ की गई। पूछताछ के लिए राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ी संख्या में सेवादार बुलाए गए थे। एसआईटी की टीम 2021 से लेकर तमाम डॉक्यूमेंट खंगाल रही है। निरीक्षण के दरमियान मिली कई खामियों पर एसआईटी ने नाराजगी जताई। अभी तक किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन के साथ SIT की टीम ने पुष्टि नहीं की है। SIT की टीम कल सुबह भी राम मंदिर परिसर में जांच और आरोपियों से करेगी पूछताछ करेगी।
एसआईटी की जांच पर भरोसा: नृपेंद्र मिश्रा
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा घोटाले को लेकर चल रही जांच के बीच श्री राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने एसआईटी जांच पर भरोसा जताया। अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिस तेजी से एसआईटी का गठन किया, वह अपने आप में प्रशंसनीय कदम है। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अब जांच में किसी प्रकार की ढिलाई बरती जाएगी।
जांच के दो पहलू
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि इस मामले के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। पहला, कथित अनियमितताओं से जुड़ा आपराधिक पक्ष, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। दूसरा, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यवस्था में सुधार का पक्ष। उनका कहना था कि जब तक इन दोनों बिंदुओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक श्रद्धालुओं का पूर्ण विश्वास दोबारा हासिल करना संभव नहीं होगा। नृपेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि एसआईटी को राम मंदिर प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग दिया जाएगा। साथ ही जिला प्रशासन ने भी जांच में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।
अखिलेश पर बीजेपी ने साधा निशाना
वहीं दूसरी तरफ चढ़ावा चोरी की जांच की मांग करने वाले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्शन शुरू होते ही पिच बदल ली है। अखिलेश यादव अब कह रहे हैं कि धर्म को आगे बढ़ाने वालों की जांच अफसर करेंगे, तो ये सनातन का अपमान होगा। अब अखिलेश का प्रस्ताव है कि मंदिर की लाइट और कैमरे बंद कर दिए जाए। चढ़ावा चोर खुद लाकर चुराए हुए पैसे लौटा जाएगा। अखिलेश यादव को जैसे ही सनातन की फिक्र हुई तो बीजेपी ने भी पलटवार कर दिया है। बृजेश पाठक ने कहा कि चढ़ावा तो बाबरी मस्जिद के लिए भी जमा हुआ था, उसके बारे में अखिलेश एक बार सवाल उठाकर दिखाएं। कुल मिलाकर चढ़ावा चोरी पर सियासी सीनाजोरी शुरु हो गई है। सवाल ये है कि चढ़ावा चोरी का सच क्या है?
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