कानपुर। विवाह के लिए जीवनसाथी की तलाश कर रहे युवकों की भावनाओं को हथियार बनाकर ठगी करने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जानकारी के अनुसार यह गिरोह अत्यआधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फर्जी मैट्रिमोनियल वेबसाइटों और कॉल सेंटर के जरिए देशभर के लोगों को निशाना बना रहा था। आरोपियों ने शादी का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी की और अपने पूरे नेटवर्क को एक वैध वैवाहिक सेवा की तरह पेश किया। ऐसे में पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह शादी की इच्छा रखने वाले युवकों की मनोवैज्ञानिक कमजोरियों को समझकर उन्हें अपने जाल में बुरी तरह से फंसाता था। शुरुआत में पीड़ितों को ऐसा महसूस कराया जाता था कि उनकी शादी जल्द ही तय होने वाली है, लेकिन धीरे-धीरे उनसे अलग-अलग बहानों से पैसे वसूले जाते थे।
कैसे जुटाया जाता था डेटा?
घटना का खुलासा करने वाली कानपुर साइबर पुलिस की जांच में पता चला कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से अविवाहित युवकों का डेटा इकट्ठा करते थे। इसके बाद उन्हें फोन कर खुद को प्रतिष्ठित वैवाहिक संस्था का प्रतिनिधि बताया जाता था।गिरोह ने अपने नेटवर्क को विश्वसनीय दिखाने के लिए "परफेक्ट रिश्ते", "शादी मैच" और "शादी मैच इंडिया" जैसे नामों का इस्तेमाल किया। इन नामों के जरिए लोगों को भरोसा दिलाया जाता था कि वे एक अधिकृत और भरोसेमंद वैवाहिक संस्था से जुड़े हैं।
AI से बनती थी खूबसूरत दुल्हनों की प्रोफाइल
जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि आरोपी AI तकनीक और एडिटेड तस्वीरों का इस्तेमाल कर आकर्षक महिला प्रोफाइल तैयार करते थे। इन प्रोफाइलों में ऐसी तस्वीरें लगाई जाती थीं जो देखने में पूरी तरह वास्तविक लगती थीं। इसके बाद कॉल सेंटर में बैठी महिला कर्मचारियों को कथित दुल्हन बनाकर पीड़ितों से बातचीत कराई जाती थी। घंटों फोन पर बातचीत, भविष्य के सपने और शादी की योजनाओं पर चर्चा कर पीड़ितों का भरोसा जीता जाता था। कई मामलों में पीड़ितों को यह विश्वास हो जाता था कि उनका रिश्ता लगभग तय हो चुका है।
हर कदम पर होती थी वसूली
शादी का सपना देख रहे युवाओं और युवकों का एक बार भरोसा कायम हो जाने के बाद ठगी का असली खेल शुरू होता था। पीड़ितों से कभी रजिस्ट्रेशन शुल्क, कभी प्रोफाइल एक्टिवेशन फीस, कभी परिवार की सहमति शुल्क, तो कभी सुरक्षा जमा राशि के नाम पर पैसे मांगे जाते थे। आरोपी यह भी दावा करते थे कि लड़की पक्ष ने भी प्रक्रिया के लिए पैसा जमा किया है और अब रिश्ता आगे बढ़ाने के लिए लड़के को भी निर्धारित राशि जमा करनी होगी। शादी जल्दी तय होने की उम्मीद और रिश्ता टूटने के डर के कारण कई लोग बिना ज्यादा सवाल किए पैसे भेजते रहते थे।
शिकायत होने पर दबाव और समझौते की कोशिश
पुलिस के अनुसार जब किसी पीड़ित को ठगी का संदेह होता था और वह शिकायत दर्ज कराने की बात करता था, तब गिरोह के सदस्य उसे मनाने की कोशिश करते थे। कई बार शिकायत वापस लेने या समझौता करने का दबाव भी बनाया जाता था ताकि पूरा नेटवर्क सुरक्षित रहे और पुलिस तक मामले की जानकारी न पहुंचे। और ये ठगी का खेल ऐसे ही पनपता रहे ।
साइबर पुलिस ने खोली ठगी की परतें
कानपुर साइबर पुलिस की कार्रवाई में इस संगठित नेटवर्क की कई परतें खुलकर सामने आई हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह ने देशभर में कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और अब तक कितनी रकम की ठगी की गई है।
कानपुर पुलिस आयुक्त ने लोगों को किया सतर्क
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी मैट्रिमोनियल वेबसाइट, एजेंसी या ऑनलाइन रिश्ते पर आंख बंद कर भरोसा न करें। किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले संस्था और संबंधित व्यक्ति की पूरी जांच-पड़ताल करें। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें। यह मामला सिर्फ साइबर ठगी का नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं और शादी जैसे संवेदनशील विषय का फायदा उठाकर किए जा रहे सुनियोजित अपराध का उदाहरण है। AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह खुलासा एक बड़ी चेतावनी भी है कि डिजिटल दुनिया में दिखने वाला हर रिश्ता और हर चेहरा असली नहीं होता। (रिपोर्ट: अनुराग श्रीवास्तव)
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