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CM योगी ने सुनाई भू-माफिया से जमीन वापस लेने की कहानी, बताया कैसे बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Oct 24, 2026 12:55 pm IST,  Updated : Oct 24, 2026 01:02 pm IST

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंसेज जिस जमीन पर है, पहले उस पर लैंड माफिया का कब्जा था। उन्होंने पूरी कहानी बताई कि कैसे उस लैंड माफिया ने सरकार के आगे सरेंडर कर दिया।

CM Yogi Adityanath- India TV Hindi
योगी आदित्यनाथ Image Source : @MYOGIADITYANATH

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने AI, साइबर फॉरेंसिक, क्वांटम टेक्नोलॉजी और डेटा प्रोटेक्शन से जुड़े विषयों पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय समिट टेक संगम को संबोधितकरते हुए जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच मानवीय विवेक और जिम्मेदारी को सबसे ऊपर रखने की जरूरत बताई  वहीं उन्होंने फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट बनने की कहानी भी शेयर की। इसी इंस्टीट्यूट में टेक संगम का आयोजन किया जा रहा है। सीएम योगी ने बताया कि इस जमीन पर पहले भूमाफिया का कब्जा हुआ करता था। उनकी सरकार बनने के बाद इसे मुक्त कराया गया और उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंसेज की स्थापना हुई

टेक संगम में सीएम योगी का संबोधन

सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि  AI जल्द निर्णय लेने में मददगार हो सकता है, लेकिन उसे इंसानों के लिए निर्णायक नहीं बनना चाहिए। AI का संचालन इंसान के हाथ में होना चाहिए और उसके इस्तेमाल में मानवीय विवेक की भूमिका महत्वपूर्ण रहनी चाहिए। सीएम योगी AI, साइबर फॉरेंसिक, क्वांटम टेक्नोलॉजी और डेटा प्रोटेक्शन से जुड़े विषयों पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय समिट टेक संगम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि AI पर पूरी तरह निर्भर होकर काम करना भविष्य में संकट का कारण बन सकता है। तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षित, विश्वसनीय और जनहितकारी बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।

नई संभावनाओं के साथ नई चुनौतियां भी

सीएम योगी ने कहा कि  एआई ने समस्याओं के समाधान की भी नई संभावनाएं हम सब के लिए खोली हैं। और जिस महत्वपूर्ण विषय की ओर हम आगे बढ़ रहे हैं वह है क्वांटम कंप्यूटिंग का। भविष्य की तकनीकी क्षमता का यह एक नए द्वार भी हम सब के लिए खोल रहा है। लेकिन इन सभी संभावनाओं के साथ हमारे सामने जो चुनौतियां हैं, उनमें डीपफेक का है, साइबर फ्रॉड का है, पहचान की चोरी का है, और डिजिटल जो साक्ष्य हैं, उनकी विश्वसनीयता जैसी चुनौतियां भी हम सबके सामने गंभीर रूप से आज हमारे सामने खड़ी हैं। इसलिए आज की इन चुनौतियों को केवल तकनीक को विकसित करने का नहीं, बल्कि उस शक्ति को सुरक्षित, विश्वसनीय और लोकहितकारी बनाने की दिशा में कैसे हम मिलकर के कार्य कर सकते हैं, इस पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। और इसी बात को ध्यान में रख कर के भारत सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मिशन मोड पर भी एक नए प्रयास को आगे बढ़ाना प्रारंभ किया है। एआई इंडिया मिशन के माध्यम से स्वदेशी एआई क्षमताओं के विकास, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, इनोवेशन के प्रोत्साहन और सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई इकोसिस्टम के निर्माण पर भी बल दिया जा रहा है।

10 साल पहले क्या हालात थे, योगी ने बताया

सीएम योगी ने यूपी के पूर्व के हालात की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज से 10 वर्ष पहले इस प्रकार के मुद्दे पर चर्चा करना यह यूपी के लिए एक सपने जैसा था। और वह सपना जैसे इसलिए भी था हम जहां बैठे हैं यह जो भूमि थी, उस अराजकता का शिकार स्वयं हो चुकी थी। जहां पे आज उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंसेज स्थापित हुआ है, लगभग 100 एकड़ का यह क्षेत्रफल है, लखनऊ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास है। लेकिन इस भूमि पर यहां के एक भू-माफिया ने यूपी पुलिस के नाम पर होने के बावजूद भी उसने अपना नाम दर्ज करवा दिया। ये उस समय होता था। कागजों में हेराफेरी किस रूप में होती थी और कैसे दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस मौन बनी रही।आप अनुमान कर सकते हैं और मुझे इस बात की जानकारी सबसे पहले किसी और ने नहीं दी थी, उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने मुझे दी कि हमारी एक लैंड है, एयरपोर्ट के पास है, उस लैंड पर लखनऊ का एक भूमाफिया कब्जा कर लिया है, क्या किया जाना चाहिए? मैंने उनसे पूछा, मैंने कहा, "कागज हैं?" उन्होंने कहा, "हां, पूरी फाइल है।" तो मैंने उनसे फाइल मांगी और मैंने उनसे कहा कि, "भाई, आप ये फाइल मुझे दे दीजिए।" 

दुनिया की सबसे बड़ी पुलिस भू-माफिया के आगे लाचार

अब सोचिए कि भूमाफिया के सामने दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस कैसे लाचार थी। मैंने कागज मांगे मैंने फिर देखा किस अधिकारी ने यह आदेश किया था कि इसके नाम पे लैंड हो जाए। मैंने उसके खिलाफ एक जांच बिठाई। और जांच बिठाने के बाद जब उस विभाग ने अपनी गलती को जैसे ही स्वीकार किया मैंने उस पर एफआईआर लॉज करवाई।  वह हाईकोर्ट गया, तो मैंने एक और एफआईआर दर्ज करवा करके उस पर कार्रवाई प्रारंभ कर दी। दूसरी एफआईआर होते ही वह व्यक्ति सरेंडर कर गया। उसने कहा, "साहब, लैंड ले लीजिए बस मुझे बख्शे रहिए।" और तब हम लोगों ने फिर इस जमीन को माफिया के चंगुल से मुक्त कराया। और इस महत्वपूर्ण विषय पर इंटरनेशनल समिट की मेजबानी करने का अवसर इस इंस्टिट्यूट को प्राप्त हो रहा है।

बता दें कि हाल में सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज के कसारी-मसारी का नाम बदलकर श्रीकृष्णपुरी रखे जाने के फैसला लिया। इस फैसले का कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता मोहम्मद फरहान ने स्वागत किया । उन्होंने कहा कि नाम बदले जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। अगर भगवान श्री कृष्ण के नाम से इलाके का नामकरण हुआ है, तो उसी के अनुरूप उसका विकास और काम भी होना चाहिए। 

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