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'घर से 15,000 किलोमीटर दूर...' वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका में विसर्जन के लिए बर्फ से बनाई बप्पा की मूर्ति; Video

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Sep 25, 2026 01:22 pm IST,  Updated : Sep 25, 2026 01:22 pm IST

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इसमें भारतीय वैज्ञानिकों को अंटार्कटिका में विसर्जन के लिए बर्फ से बनाई गई बप्पा की मूर्ति को दिखाया गया है।

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वैज्ञानिकों ने बनाई मूर्ति। Image Source : IG/@ANIRUDHDHAR

गणेश चतुर्थी का त्योहार इस बार भारत से करीब 15,000 किलोमीटर दूर अंटार्कटिका की बर्फीली धरती पर भी अनोखे अंदाज में मनाया गया। भारत के मैत्री रिसर्च स्टेशन पर तैनात वैज्ञानिकों ने बर्फ से गणपति बप्पा की मूर्ति बनाई और उसका इको-फ्रेंडली विसर्जन किया। इस खास पल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। 

इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो 

इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को @anirudhdhar नामक हैंडल से शेयर किया गया है। नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (एनसीपीओआर) के शोधकर्ताओं ने मैत्री स्टेशन पर बर्फ को गढ़कर गणेश जी की मूर्ति तैयार की। मूर्ति को फूलों की माला और छोटी सजावट से सजाया गया। वैज्ञानिकों ने पारंपरिक तरीके से आरती और पूजा की, “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे लगाए और फिर विसर्जन किया। विसर्जन के लिए मूर्ति को स्टेशन के अंदर पानी से भरी बाल्टी में रखा गया, जहां बर्फ धीरे-धीरे पिघलकर पानी में मिल गई। यह पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल तरीका था।

बप्पा का इको-फ्रेंडली स्वरूप

इस उत्सव का वीडियो डॉ. अनिरुद्ध धर ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया, जो मैत्री स्टेशन पर डॉक्टर के रूप में तैनात हैं। कैप्शन में उन्होंने लिखा, “इको-फ्रेंडली Immersion को एक नए स्ता पर ले जाना, घर से 15,000 किलोमीटर दूर। हमारी हस्तनिर्मित बर्फ की बप्पा जितनी सस्टेनेबल हो सकती है। गणपति बप्पा मोरया!” उन्होंने अर्विंद होसलकर और कार्तिक पी. को मूर्ति बनाने का श्रेय दिया। वैज्ञानिकों ने घर का स्वाद बनाए रखने के लिए हाथ से बने मोदक भी प्रसाद के रूप में बांटे। 

अंटार्कटिका में आसान नहीं त्योहार मनाना

 अंटार्कटिका जैसी कठोर परिस्थितियों में त्योहार मनाना आसान नहीं होता। यहां तापमान बहुत कम रहता है और सुविधाएं सीमित हैं। फिर भी वैज्ञानिकों ने अपनी संस्कृति और आस्था को जीवित रखा। बर्फ से बनी मूर्ति न सिर्फ रचनात्मक थी, बल्कि पर्यावरण की रक्षा का भी संदेश देती है। पारंपरिक मिट्टी या प्लास्टर की मूर्तियों के बजाय बर्फ का इस्तेमाल पूरी तरह प्राकृतिक और शून्य प्रदूषण वाला था। 

यूजर्स ने की तारीफ 

वीडियो में मैत्री स्टेशन के दृश्य, मूर्ति गढ़ते वैज्ञानिक, आरती का माहौल और विसर्जन का पल साफ दिखता है। लोग “गणपति बप्पा मोरया” का जाप करते नजर आते हैं। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को खूब पसंद किया जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे “सबसे कूल बप्पा” और “आस्था का अनोखा उदाहरण” बताया। कुछ ने वैज्ञानिकों की मेहनत और रचनात्मकता की तारीफ की।

गौरतलब है कि, इससे पहले गणपति बप्पा के विसर्जन का वीडियो वायरल हुआ था जिसे 5.5 करोड़ लोगों ने देखा था। 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

 
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