Viral Post : फ्लाइट और ट्रेन में कूड़ा फैलाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो अक्सर दिखाते हैं कि यात्री खाने के पैकेट, पानी की बोतलें, चिप्स के रैपर और अन्य कचरा सीटों पर, फर्श पर या खिड़की से बाहर फेंक देते हैं। इसके कई कारण हैं पहला, सिविक सेंस की कमी और व्यक्तिगत जिम्मेदारी का अभाव। एक उद्यमी ने अपने एक्सपीरिएंस को शेयर करने के बाद लोगों के सिविक सेंस पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट में उद्यमी ने बताया कि वह एक सलीके से कपड़े पहने सहयात्री के बगल में बैठे थे, जिसने नाश्ता खत्म करने के बाद खाली रैपर को ठीक से फेंकने के बजाय लापरवाही से अपने सामने वाली सीट के नीचे रख दिया।
एक्स पर पोस्ट हुई वायरल
इस पोस्ट को एक्स पर @theswapnilsri नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इस पोस्ट में उन्होंने बताया कि नियमित अनाउंसमेंट और फ्लाइट सेवा के बावजूद जहां केबिन क्रू सक्रिय रूप से यात्रियों की ट्रे टेबल से कचरा इकट्ठा करते हैं, छिपा हुआ कचरा अनदेखा रह जाता है और संभवतः उड़ान के उतरने के बाद भी वहीं पड़ा रहता है। पोस्ट में लिखा था कि, 'उसने अपना नाश्ता खत्म किया। अपने हाथ में रखे कचरे को देखा और उसे सामने वाली सीट के नीचे फर्श पर रख दिया। यह जानबूझकर किया गया था। केबिन क्रू कचरा उठाने के लिए आया और उसने अपना काम बखूबी किया। हर किसी के हाथों और हर ट्रे टेबल से कचरा इकट्ठा किया गया, फर्श पर पड़ा कचरा, जो उस कोण से आसानी से नज़र से छूट सकता था, वहीं पड़ा रहा। विमान उतर गया। उसके कप और खाने का डिब्बा अभी भी विमान के फर्श पर ही पड़े थे।'
'यह मेरी समस्या नहीं'
अपनी पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा कि, "यह मेरी समस्या नहीं है" वाली मानसिकता शिक्षित और सामाजिक रूप से जागरूक दिखने वाले व्यक्तियों में भी बनी रहती है। उन्होंने सुझाव दिया, "यह अब जागरूकता का मामला नहीं है," और कहा कि समस्या अधिकार की भावना में है, जहां लोग यह मान लेते हैं कि साझा स्थानों में स्वच्छता बनाए रखना किसी और की जिम्मेदारी है। उद्यमी ने कहा कि, 'भारत में ज्यादातर लोगों ने अनजाने में यह मान लिया है कि सार्वजनिक स्थान, हवाई अड्डे, सड़कें, पार्क, फुटपाथ, उनकी जिम्मेदारी नहीं हैं। सफाई के लिए किसी को वेतन मिलता है कोई न कोई इसे संभाल लेगा। मैं? मैं तो बस यहां से गुजर रहा हूं और यही मानसिकता समस्या की जड़ है। क्योंकि नागरिक भावना सिर्फ आपके कार्यों से नहीं, बल्कि इस बात से भी जुड़ी है कि आप किस चीज को सामान्य मानते हैं। हर बार जब कोई कूड़ा फेंकता है और कोई प्रतिक्रिया नहीं देता, तो सामाजिक स्तर थोड़ा और गिर जाता है।'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
इस पोस्ट के वायरल होते ही इस पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने लिखा, 'एक आदमी ने सड़क पर थूक दिया, और जब मेरी दोस्त ने उससे इस बारे में बात की, तो उसने पूछा कि क्या यह सड़क उसके पिता ने बनवाई थी। वह आदमी पीएचडी कर रहा है और अब प्रोफेसर भी है। ज़रा इस बात पर गौर कीजिए।' दूसरे ने लिखा कि, 'मैं पूरी तरह सहमत हूं!! हाल ही में, मैं ट्रेन से घर जा रहा था। वहाँ चार से पांच महिलाओं का एक परिवार था। जब उनकी बच्ची ने प्लास्टिक का कचरा कूड़ेदान में डालने की इच्छा जताई, तो उसकी मां ने उसे सीधे पटरियों पर फेंकने के लिए कहा, यह कहते हुए कि सफाईकर्मियों को इसे साफ करने के लिए नियुक्त किया गया है।' तीसरे ने लिखा कि, 'मैंने एक सलीके से तैयार, सूट पहने, जूते पॉलिश किए हुए, सलीके से सजे-धजे सज्जन को देखा; लेकिन सब कुछ तब धराशायी हो गया जब वह अचानक रुका और निर्माण स्थल के पास सड़क किनारे खुलेआम पेशाब करने लगा, जबकि सीआईएसएफ के जवान भी मौजूद थे। जी हां, मैंने यह मुंबई हवाई अड्डे पर देखा।' वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा कि, 'भारतीय जनता की मानसिकता में बदलाव की उम्मीद करना भी बेकार है, शिक्षा केवल पैसा कमाने और रुतबा दिखाने पर केंद्रित है, नागरिक भावना वैकल्पिक नहीं बल्कि एक गौण विषय बन जाएगी।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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