गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज में एक दुर्लभ कछुआ मिलने की बात कही जा रही है, जिसको लेकर ये दावा किया जा रहा है कि उसकी पीठ पर A-B-C-D लिखा हुआ है। इस कछुआ का वीडियो भी सामने आया है।
क्या है पूरा मामला?
गोपालगंज में एक ऐसा कछुआ मिला है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। कछुआ की पीठ पर बने प्राकृतिक निशान बिल्कुल अंग्रेजी के A-B-C-D जैसे दिखाई दे रहे हैं। इस कछुआ को देखने के लिए मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
खास बात ये है कि कछुआ की पीठ पर ये निशान किसी इंसान के बनाए हुए नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से बने पैटर्न बताए जा रहे हैं।
पीले रंग से बने अक्षर दिखाई दिए
ये कछुआ इन दिनों गोपालगंज में चर्चा का विषय बना हुआ है। पानी के बीच मिले इस कछुआ को जब लोगों ने करीब से देखा, तो उसकी पीठ पर बने पीले रंग के निशानों ने सबका ध्यान खींच लिया।
कछुआ के सख्त खोल पर बने ये निशान पहली नजर में अंग्रेजी के A, B, C और D जैसे दिखाई देते हैं। ऐसा लगता है कि मानो किसी ने कछुआ की पीठ पर अक्षर लिख दिए हों लेकिन हैरानी की बात ये है कि ये आकृतियां प्राकृतिक बताई जा रही हैं।
कछुआ की सिर्फ पीठ ही नहीं, बल्कि उसके शरीर की बनावट भी लोगों का ध्यान खींच रही है। इसके पैर और गर्दन की संरचना सामान्य तौर पर दिखाई देने वाले कछुओं से अलग नजर आ रही है।
इसी वजह से इसके किसी दुर्लभ प्रजाति का होने की चर्चा शुरू हो गई। हालांकि कछुआ की प्रजाति की वैज्ञानिक पुष्टि अभी बाकी है। स्थानीय स्तर पर इसे गंडक नदी और हालिया बाढ़ के पानी से बहकर मैदानी इलाके में पहुंचने की संभावना से भी जोड़ा जा रहा है।
मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई
हर कोई अपने मोबाइल में इसकी तस्वीर और वीडियो कैद करने में जुटा नजर आया। सबसे ज्यादा चर्चा कछुआ की पीठ पर बने उन अनोखे निशानों की हो रही है, जो बिल्कुल अंग्रेजी के अक्षरों जैसे दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों के लिए ये कछुआ कौतूहल और हैरानी का बड़ा कारण बना हुआ है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, दुनिया में कछुओं की कई अलग-अलग प्रजातियां पाई जाती हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, यह कछुआ उत्तर भारत में पाए जाने वाले किसी विशेष प्रकार का कछुआ हो सकता है। अधिकारी के मुताबिक, ऐसी प्रजातियां आम तौर पर स्थिर या धीमी गति वाले मीठे पानी के जलाशयों में पाई जाती हैं और इनका मिलना काफी कम देखने को मिलता है, हालांकि इसकी सटीक पहचान के लिए विशेषज्ञ जांच जरूरी है।
तस्वीरों के आधार पर कुछ लोग इसे इंडियन फ्लैपशेल टर्टल, यानी Lissemys punctata, से जोड़कर देख रहे हैं। यह दक्षिण एशिया में पाया जाने वाला मीठे पानी का कछुआ है। इसके खोल पर पीले रंग के निशान और शरीर की बनावट इसकी पहचान में मदद कर सकती है लेकिन सिर्फ तस्वीर के आधार पर प्रजाति की पुष्टि नहीं की जा सकती, इसके लिए वन्यजीव विशेषज्ञों की जांच जरूरी होगी।
सबसे अहम बात ये है कि अगर कोई दुर्लभ या संरक्षित वन्यजीव मिले, तो उसे अपने पास रखना, नुकसान पहुंचाना या उसके साथ छेड़छाड़ करना उचित नहीं है, ऐसे वन्यजीव को सुरक्षित रखने और वन विभाग को सूचना देने की जरूरत है।
कैमरे में कैद इस अनोखे कछुआ की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में हैं लेकिन इसकी असली प्रजाति और पीठ पर बने इन अनोखे पैटर्न का वैज्ञानिक रहस्य क्या है, इसका जवाब विशेषज्ञ जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।
इससे पहले भारत में दुलर्भ प्रजाति का 'पीला कछुआ' दिखा था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। (रिपोर्ट- गोपालगंज से अयाज अहमद की रिपोर्ट)
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