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'1 लाख रुपये की सैलरी 30 हजार जैसी लगती है..' गुरुग्राम में महंगाई से तंग आ चुकी CA का छलका दर्द

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Jul 01, 2026 11:15 pm IST,  Updated : Jul 01, 2026 11:15 pm IST

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक महिला सीए का वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इसमें उसने गुरुग्राम में बढ़ती पर चिंता व्यक्त की है।

Gurugram Inflation Hike, How to survive in Gurugram, Gurugram Viral Video - India TV Hindi
गुरुग्राम की महिला का वीडियो वायरल। Image Source : IG/@CA_INGURGAON

मुंबई, दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और बेंगलुरु जैसे शहरों में किराया, खाने-पीने की चीजें और परिवहन खर्च में तेज उछाल आया है। तेज शहरीकरण और बड़े पैमाने पर प्रवासन, रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतें, ईंधन और परिवहन लागत में वृद्धि को इसकी वजह माना जाता है। महंगाई, बुनियादी ढांचे पर दबाव और मांग-आपूर्ति के असंतुलन ने आम मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। ऐसा ही कुछ गुरुग्राम की एक महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ भी हुआ है। उसका दावा है कि, इंफ्लेशन और रोजमर्रा के खर्चों के कारण 1 लाख रुपये का मासिक वेतन अब बहुत कम लगता है।

इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो 

इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @ca_ingurgaon नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे जीवनयापन की लागत बढ़ गई है और क्यों छह अंकों की मासिक आय अब कई मध्यमवर्गीय वेतनभोगी लोगों के लिए वह आराम प्रदान नहीं करती जो कभी करती थी। मुस्कान मित्तल ने कहा कि '1 लाख रुपये प्रति माह अब 30,000 रुपये के बराबर है। ऐसा इसलिए नहीं कि आप फिजूलखर्ची कर रहे हैं, बल्कि इसलिए कि जीवन महंगा हो गया है। प्रति माह 1 लाख रुपये कमाने वाला व्यक्ति अपनी आय को आवश्यक जरूरतों, जीवनशैली संबंधी खर्चों और बचत में कैसे खर्च कर सकता है।'  

गिनाया एक-एक खर्च 

उनके अनुमान के अनुसार, किराए पर सबसे ज्यादा 25,000 रुपये खर्च होते हैं, उसके बाद किराने का सामान और खाने-पीने पर 10,000 रुपये खर्च होते हैं। उन्होंने कहा कि फ्यूल कैब या मेट्रो यात्रा जैसे आवागमन के खर्चे हर महीने लगभग 5,000 रुपये आते हैं। बिजली, वाई-फाई और मोबाइल बिल जैसी बुनियादी उपयोगिताओं का कुल खर्च लगभग 3,000 रुपये आता है। उन्होंने आगे कहा कि खरीदारी और व्यक्तिगत देखभाल पर प्रति माह लगभग 5,000 रुपये खर्च हो सकते हैं, जबकि बाहर खाना खाने और मनोरंजन पर भी लगभग 5,000 रुपये खर्च हो सकते हैं। मुस्कान ने आगे कहा कि 7,000 रुपये बीमा, चिकित्सा आवश्यकताओं और आपात स्थितियों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं, साथ ही 5,000 रुपये परिवार के भरण-पोषण, उपहार और अन्य विविध खर्चों के लिए रखे जा सकते हैं। 

बचत के बारे में भी दी राय

बचत के संबंध में, उन्होंने एसआईपी और निवेश में 20,000 रुपये और आपातकालीन निधि या अतिरिक्त बचत में 15,000 रुपये लगाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जब सभी खर्चों और बचत को मिला दिया जाता है, तो पूरी 1 लाख रुपये की मासिक आय आवंटित हो जाती है, जिससे बहुत कम अतिरिक्त धन बचता है। मुस्कान ने यह भी कहा कि बजट बनाना हर रुपये की बचत करने के बारे में नहीं है, बल्कि वर्तमान आराम और भविष्य की वित्तीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने के बारे में है। उन्होंने कहा, "लक्ष्य हर एक रुपया बचाना नहीं है। लक्ष्य है कल से समझौता किए बिना आज का आनंद लेना।" 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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