स्मार्ट क्लास, डिजिटल बोर्ड या महंगे गैजेट्स की दुनिया में केरल की एक बुजुर्ग महिला का पारंपरिक तरीका सोशल मीडिया पर छा गया है। वे बच्चों को पढ़ाने के लिए कॉपी-पेन या ब्लैकबोर्ड के बजाय सिर्फ रेत और एक छोटी छड़ी का इस्तेमाल करती हैं। उनका यह सरल और प्यारा अंदाज लोगों का दिल जीत रहा है। महिला को प्यार से आशाट्टी अम्मुम्मा या इंदिरा अम्मा कहा जाता है। वे करीब 85 साल की हैं और केरल के आलप्पुझा जिले में रहती हैं। पिछले करीब 10 साल से वे बच्चों को पढ़ा रही हैं। उनका तरीका केरल की पारंपरिक शिक्षण पद्धति ‘आशान कलारी’ से जुड़ा है। वीडियो में वे पारंपरिक सफेद साड़ी पहने बरामदे में चटाई पर बैठे छोटे बच्चों के सामने रेत फैलाती नजर आती हैं।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @mom_of_safaachiiii हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में आशाट्टी अम्मुम्मा एक बाल्टी में रेत लेकर आती हैं और जमीन पर फैला देती हैं। फिर लकड़ी की छोटी छड़ी से रेत को बराबर करती हैं, ताकि उस पर आसानी से लिखा जा सके। इसके बाद वे छड़ी से अंग्रेजी या मलयालम अक्षर लिखती हैं और कर्सिव फॉर्म भी दिखाती हैं। बच्चे ध्यान से देखते हैं और अपनी उंगलियों से रेत पर उन्हीं अक्षरों को दोहराते हैं। कोई कॉपी नहीं, कोई पेन नहीं – सिर्फ रेत और सीखने का मजा। वीडियो तेजी से वायरल हो गया। लोग कमेंट में लिख रहे हैं कि शिक्षा के लिए पैसे की जरूरत नहीं, बस अच्छा आइडिया चाहिए। एक यूजर ने कहा कि बुढ़ापे में भी इतनी खूबसूरत लग रही हैं। दूसरे ने लिखा कि यह दुनिया का सबसे प्यारा क्लासरूम है।
बच्चों को पढ़ाने की अनोखी तकनीक
यह तरीका न सिर्फ किफायती है बल्कि बच्चों के लिए मजेदार भी है। रेत पर लिखने-मिटाने से वे आसानी से प्रैक्टिस कर सकते हैं। गलती हो जाए तो तुरंत साफ करके दोबारा लिख सकते हैं। महिला धैर्य और प्यार से सिखाती हैं। उनका चेहरा और अंदाज देखकर लगता है जैसे कोई दादी अपने पोते-पोतियों को सिखा रही हों।
'सीखने का मूल सरलता में है'
कई यूजर्स ने लिखा कि, 'आज के समय में जब शिक्षा महंगी और टेक्नोलॉजी पर निर्भर हो गई है, तब आशाट्टी अम्मुम्मा का तरीका याद दिलाता है कि सीखने का मूल सरलता में है।' रेत जैसी आम चीज से वे बच्चों को अक्षर, नंबर और गणित सिखा रही हैं। मलयालम, हिंदी और अंग्रेजी सब कुछ। यह वीडियो सिर्फ पढ़ाने का तरीका नहीं दिखाता, बल्कि बुजुर्गों के ज्ञान और जुनून को भी उजागर करता है। उम्र के इस पड़ाव पर भी वे बच्चों के भविष्य के लिए योगदान दे रही हैं। सोशल मीडिया पर लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसी शिक्षिकाएं प्रेरणा हैं।
गौरतलब है कि, इससे पहले बच्चों को जंक फूड से बचाने के लिए टीचर्स द्वारा अपनाया गया मजेदार हैक वायरल हुआ था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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