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'बाहर खाना खाने के अलावा कुछ खास नहीं है...' भारत के टियर 1 शहरों पर शख्स की राय वायरल, यूजर्स ने दिए जवाब

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Aug 02, 2026 05:50 pm IST,  Updated : Aug 02, 2026 05:50 pm IST

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट वायरल हो रही है। इसमें शख्स ने भारत के टियर 1 शहरों पर अपनी राय दी है।

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शख्स का वीडियो वायरल। Image Source : IG/@THE.HEADLESS

भारत के बड़े शहरों में जीवन को लेकर एक शख्स की राय वायरल हो गई और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। इंस्टाग्राम पर शख्स अपने वीडियो में कहा कि मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और पुणे जैसे टियर 1 शहरों में बाहर खाना खाने या शॉपिंग के अलावा करने को ज्यादा कुछ नहीं है। उनका वीडियो वायरल हो गया और यूजर्स ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दीं।  वीडियो में शख्स ने कहा, “क्या आपने कभी महसूस किया कि मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहर इतने लोकप्रिय होने के बावजूद खाने-पीने के अलावा करने को ज्यादा कुछ नहीं है? मैं हाल ही में पुणे गया था और शहर एक्सप्लोर करना चाहता था, लेकिन कैफे और रेस्टोरेंट के अलावा कुछ नहीं था। यही मैं मुंबई में भी करता हूं।” 

इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो 

इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @the.headless नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में उन्होंने कहा, "क्या आपने कभी गौर किया है कि मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहर इतने लोकप्रिय होने के बावजूद, खाने-पीने के अलावा वहां करने को कुछ खास नहीं है? मैं हाल ही में पुणे गया था और शहर घूमना चाहता था, लेकिन वहां कैफे और रेस्टोरेंट जाने के अलावा कुछ खास करने को नहीं था, जो मैं मुंबई में भी अक्सर करता हूं।" उन्होंने आगे कहा कि कुछ महीने पहले बेंगलुरु की यात्रा के दौरान भी उन्हें इसी तरह का अनुभव हुआ था। उन्होंने कहा, "हमारे शहर पूरी तरह से उपभोग के केंद्र बन गए हैं। अच्छा समय बिताने का एकमात्र तरीका पैसा खर्च करना है। अधिकांश निवेश मॉल, शॉपिंग सेंटर, कैफे और रेस्तरां में जाता है, जिससे हमें अपने शहरों या अपनी संस्कृति का अनुभव करने के बहुत कम अवसर मिलते हैं।" कंटेंट क्रिएटर ने यह भी तर्क दिया कि जो लोग नियमित रूप से संस्कृति से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए पर्याप्त किफायती संग्रहालय, पुस्तकालय, कला प्रदर्शनियां, संगीत कार्यक्रम या नृत्य प्रदर्शन उपलब्ध नहीं हैं। 

'हमारे शहर पैदल चलने लायक नहीं'

शख्स ने कहा कि, "हमारे साथ उपभोक्ताओं जैसा व्यवहार किया जाता है, नागरिकों जैसा नहीं। यही कारण है कि हमारे शहर पैदल चलने लायक नहीं हैं, अच्छी तरह से रखरखाव वाले सैरगाह बहुत कम हैं, हरियाली न के बराबर है और सार्वजनिक स्थान भी नाममात्र के हैं। जो मौजूद हैं, उनका भी अक्सर रखरखाव ठीक से नहीं किया जाता। यह बहुत थकाने वाला है।" 

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

इस वीडियो को दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिलीं। एक यूजर ने लिखा कि, 'पूरी तरह सहमत हूं।'

दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'यह बिल्कुल सच है। मैं मुंबई में किसी और कैफे में नहीं जाना चाहता।'

तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'हमें पार्क, कला स्थल, कार्यशाला स्थल और प्रदर्शन स्थल चाहिए। यह दुखद है कि शहर की योजना सामुदायिक विकास के बजाय उपभोक्तावाद के इर्द-गिर्द घूमती है।'

चौथे यूजर ने लिखा कि, 'भगवान का शुक्र है कि मैं कोलकाता से हूं।'

पांचवें यूजर ने लिखा कि, 'चंडीगढ़ आ जाओ, भाई।'

एक यूजर ने लिखा कि, 'मुंबई ठीक है। लेकिन दिल्ली नहीं। वहां तो ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से बहुत सारे महत्वपूर्ण स्थान हैं।'

एक और ने लिखा कि, 'कृपया दिल्ली आइए। यहां ढेर सारे संग्रहालय, ऐतिहासिक स्मारक और पार्क हैं, और कई संग्रहालयों में मुफ्त प्रवेश मिलता है।'

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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