आप अगर दिल्ली, कोलकाता, जयपुर, पटना और ऐसे किसी शहर में रहते हैं जहां मेट्रो की सुविधा है तो ऐसा हो ही नहीं सकता है कि आपने कभी भी मेट्रो में सफर नहीं किया होगा। कई शहरों में तो हर रोज बड़ी संख्या में लोग मेट्रो का ही सफर करते हैं क्योंकि इससे लोगों को ट्रैफिक से राहत मिलती है और वो अपने गंतव्य जैसे ऑफिस, स्कूल आदी जगहों पर समय से पहुंच जाते हैं। कई सारे लोग तो रेगुलर मेट्रो में सफर करते हैं और अगर आप भी उनमें से एक हैं तो फिर आपने नोटिस किया होगा कि स्टेशन पर प्लेटफॉर्म के किनारे पीले रंग की पट्टियां होती हैं। आपने क्या कभी सोचा है कि वो पीले रंग की पट्टियां क्यों होती हैं?
आखिर क्यों बनी होती हैं पीले रंग की पट्टियां?
मेट्रो स्टेशन पर सफर करते समय आपने ऐसी अनाउंसमेंट तो सुनी ही होगी जिसमें यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर लगे पीली पट्टियों से पीछे रहने के लिए कहा जाता है। आइए आपको बताते हैं कि वो किसके लिए लगे होते हैं। दरअसल पीले रंग की पट्टियां ऊबड़-खाबड़ टाइल्स से बनी होती हैं और इन्हें टेंजी ब्लॉक्स कहते हैं। जापान में इसका आविष्कार हुआ था और प्लेटफॉर्म पर इन्हें दृष्टिबाधित लोगों के लिए लगाया जाता है ताकि वो अपनी छड़ी से प्लेटफॉर्म के किनारे का पता लगा सके और प्लेटफॉर्म पर गिरने से बच सके।
पीला रंग ही क्यों चुना जाता है?
अब इतना जानने के बाद आपके दिमाग में एक सवाल यह भी आया होगा कि इन पट्टियों का रंग पीला ही क्यों होता है। आपको बता दें कि पीला रंग बहुत सोच समझकर चुना जाता है। आपको बता दें कि पीला रंग बहुत दूर से ही दिख जाता है और कई दृष्टिबाधित लोगों को यह रंग आसानी से दिख जाता है। आपको यह भी बता दें कि यह पट्टियां दूसरे लोगों की सुरक्षा के लिए भी होती हैं। इन पट्टियों से दूसरे यात्रियों को भी पीछे रहने के लिए कहा जाता है ताकि ट्रेन के आने पर हवा के दबाव से बनने वाले खिंचाव से यात्री बच सकें।
नोट: इस आर्टिकल में आपको दी गई पूरी जानकारी अलग-अलग रिपोर्ट्स के आधार पर है और इंडिया टीवी ऊपर दी गई जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।
ये भी पढ़ें-
ट्रेन की पटरियों पर क्यों बिछे होते हैं पत्थर? रोज सफर करने वाले भी नहीं जानते होंगे इसका लॉजिक
दुनिया में अधिकतर सड़कें काले रंग की ही क्यों बनती हैं? खाली समय में कभी सोचा है?