बचपन से लेकर बड़े होने तक लगभग हर कोई और कुछ बूढ़े होने तक भी किताब पढ़ते हैं। बचपन से बड़े होने तक हम लोग अपने स्कूल, कॉलेज और एग्जाम की तैयारी की वजह से कई सारी किताबें पढ़ते हैं। वहीं कई लोग इन सभी के बाद भी किताबें पढ़ते हैं क्योंकि उन्हें किताब पढ़ने का बहुत शौक होता है। आपने भी किताबें खूब पढ़ी होंगी और तब तो आप भी जानते होंगे कि किताबों से हमेशा गजब का महक आती है। नई किताबों से तो वो महक बहुत ही तेज आती है तो वहीं पुरानी किताबों से एक अलग तरह की, कहें तो मीठी सी सुगंध आती है। मगर क्या आप यह जानते हैं कि इसके पीछे का कारण क्या होता है।
नई किताबों से क्यों आती है महक?
आपने नई किताबों की महक को सुंघा तो बहुत होगा। आज यह जानने का समय आ गया है कि किताबों में से महक आती क्यों हैं। आपको बता दें कि नई किताब में से महक तीन कारणों की वजह से आती है। पहला कारण कागज खुद होता है। दरअसल कागज को बनाने के लिए कुछ केमिकल का इस्तेमाल होता है जिसकी वजह से उसमें से महक आती है। इसके अलावा दूसरा कारण किताब में यूज किया हुआ इंक होता है। वहीं तीसरा कारण बुक-बाइंडिंग के प्रोसेस में इस्तेमाल होने वाला गोंद होता है। इन तीन कारणों से एक नई किताब में महक आती है।

पुराने किताबों से महक क्यों आती है?
आपने यह तो जान लिया कि नई किताबों में से महक क्यों आती है। अब आपके दिमाग में यह सवाल आ रहा होगा कि किताब पुरानी हो जाने के बाद भी उसमें से महक क्यों आती है। आइए हम आपको बताते हैं। आपने अगर नोटिस किया होगा तो आप जानते होंगे कि नई और पुरानी, दोनों किताबों में से अलग-अलग महक आती है। पुरानी किताबों में से मीठी सी महक आती है। इसके पीछे का कारण बेंज़ाल्डिहाइड, वैनिलीन, एथिल हेक्सानॉल, टोल्यूनि और एथिल बेंज़ीन जैसे केमिलक होते हैं। इन केमिकल रिएक्शन की वजह से किताब में ऐसे वोलाटाइल कंपाउंड बनते हैं जिन्हें एसिड हाइड्रोलिसिस कहते हैं। आपको बता दें कि काफी लंबे समय तक चलने वाले केमिकल रिएक्शन से ये कंपाउंड मीठी महक पैदा करते हैं।
नोट: इस आर्टिकल में दी गई सारी जानकारी अलग-अलग रिपोर्ट्स पर आधारित है और इंडिया टीवी इनकी पुष्टि नहीं करता है।
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