दिल्ली में जन्मे और पले-बढ़े उद्यमी सौरभ जैन ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने बताया कि नागरिक समस्याओं के बावजूद वे दिल्ली वापस नहीं जाना चाहते और गुरुग्राम में ही रहना पसंद करते हैं। उनका कहना है कि एक दिन गुरुग्राम में जरूर सुधार होगा।
एक्स पर शेयर की गई पोस्ट
इस पोस्ट को एक्स पर @skjsaurabh नामक हैंडल से शेयर किया गया है। सौरभ जैन अनकल मैथ लैब के संस्थापक और पेटीएम के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट हैं। वे दिल्ली में पैदा हुए और उनके पिता का परिवार सैकड़ों साल से वहां रहता था। फिर भी एक साल से भी कम समय पहले वे गुरुग्राम शिफ्ट हो गए। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट में उन्होंने लिखा— 'जितना भी गुरुग्राम का नागरिक समस्याओं के कारण मजाक उड़ाया जाता है, मैं गुरुग्राम से वापस दिल्ली शिफ्ट नहीं होना चाहता।'
क्यों बेहतर है गुरुग्राम
उन्होंने स्वीकार किया कि गुरुग्राम प्रशासन और हरियाणा सरकार नागरिक मुद्दों पर “दयनीय” रही है। फिर भी करियर के अवसर, डीएलएफ इलाकों में हरियाली, मॉल, रेस्तरां और राजस्थान-हरियाणा की सड़क कनेक्टिविटी दिल्ली से बेहतर बताई। साथ ही गेटेड कॉलोनियां, ब्लिंकिट एम्बुलेंस और अर्बन कंपनी जैसी घरेलू मदद सेवाएं भी गुरुग्राम में आसानी से उपलब्ध हैं, जो दिल्ली के ज्यादातर हिस्सों में नहीं मिलतीं।
'गुरुग्राम एक दिन जरूर बेहतर होगा'
यह पोस्ट 24 अगस्त 2026 की भारी बारिश के बाद आई, जब गुरुग्राम में जलभराव और ट्रैफिक जाम ने शहर को ठप कर दिया था। कई लोग शहर की ड्रेनेज व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की आलोचना कर रहे थे। ऐसे में सौरभ का बयान अलग नजरिया लेकर आया। उन्होंने याद किया कि 1980 के दशक के मध्य में जब वे गुरुग्राम जाते थे तो सड़कें, नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक गतिविधियां, बिजली और पानी की सप्लाई बहुत खराब थी। पिछले चार दशकों में इनमें काफी सुधार हुआ है। वे बोले कि, 'गुरुग्राम एक दिन जरूर बेहतर होगा। इसमें पिछले 40 सालों में काफी सुधार हुआ है। मेरी दादीजी का परिवार यहां का है।'
सुधार के लिए दिए सुझाव
सौरभ ने सुधार के लिए सुझाव भी दिए। बिजली का निजीकरण, ड्रेनेज व्यवस्था में बड़े पैमाने पर सुधार, पानी प्रोसेसिंग क्षमता दोगुनी करना और नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) द्वारा बेहतर सफाई—ये कदम शहर को दिल्ली से आगे ले जा सकते हैं। उनके अनुसार, कुछ क्षेत्रों में सुधार से गुरुग्राम दिल्ली को पीछे छोड़ सकता है। पोस्ट पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ लोगों ने सहमति जताई कि करियर और सुविधाओं के मामले में गुरुग्राम बेहतर है। कई ने कहा कि बारिश में जलभराव और खराब सड़कें रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल बनाती हैं। कुछ यूजर्स ने दिल्ली को इंफ्रास्ट्रक्चर, स्कूल और घरेलू मदद के मामले में बेहतर बताया। बहस ने एनसीआर में रहने की चुनौतियों और संभावनाओं दोनों को उजागर किया।
गौरतलब है कि, इससे पहले एक महिला ने गुरुग्राम में रह रहे लोगों के सबसे बड़े डर को उजागर किया था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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