उत्तर 24 परगना के गायघाटा में 17 वर्षीय किशोरी से बलात्कार और हत्या के मुख्य आरोपी प्रह्लाद दास की पुलिस के साथ हुई कथित मुठभेड़ में मौत हो गई है। पुलिस के मुताबिक, मंगलवार तड़के क्राइम सीन री-क्रिएट करने के दौरान आरोपी ने पुलिस की रिवॉल्वर छीनकर फायरिंग कर दी थी, जिसके बाद आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले रविवार को गायघाटा में एक पड़ोसी के घर के पीछे से 17 वर्षीय किशोरी का क्षत-विक्षत और निर्वस्त्र अवस्था में शव बरामद किया गया था। मृतका के परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया था कि किशोरी के साथ पहले बर्बरतापूर्ण तरीके से बलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। इस जघन्य मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने घटना के दिन ही मृतका के परिवार के ही एक रिश्तेदार प्रह्लाद दास को गिरफ्तार कर लिया था।
क्राइम सीन री-क्रिएट करने के दौरान हुई ये घटना
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार तड़के पुलिस आरोपी प्रह्लाद दास को लेकर घटनास्थल पर क्राइम सीन री-क्रिएट करने गई थी। सूत्रों का दावा है कि जब घटना का पुनर्निर्माण का कार्य समाप्त हो चुका था, तभी शातिर आरोपी प्रह्लाद ने अचानक मौके का फायदा उठाकर एक पुलिसकर्मी की रिवॉल्वर छीन ली और पुलिस दल पर फायरिंग शुरू कर दी। इस अचानक हुए हमले में एक पुलिसकर्मी के घायल होने की खबर है।
अस्पताल में हुई मौत
आरोपी द्वारा की गई गोलीबारी के बाद पुलिस ने भी अपनी आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। इस दौरान पुलिस की गोली लगने से आरोपी प्रह्लाद दास गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस फौरन उसे नजदीकी चांदपाड़ा ग्रामीण अस्पताल ले गई, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
इस मामले पर भाजपा नेता दिलीप घोष की प्रतिक्रिया
गायघाटा एनकाउंटर की इस सनसनीखेज घटना पर भाजपा नेता दिलीप घोष ने पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया है। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस के इस कदम पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी दक्षिण 24 परगना में ऐसी घटना हुई है, हत्यारा भागने की कोशिश कर रहा था तो एनकाउंटर किया गया था। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। सभी को न्याय के दायरे में लाना होगा। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। जो भी कानून का उल्लंघन करेगा, उसके साथ यही होगा। पुलिस को लोगों को न्याय दिलाना होगा। लोग भरोसा करना भूल गए थे। भरोसा वापस लाने के लिए पुलिस को कुछ अप्रिय काम भी करने होंगे। डर इतनी आसानी से कोई नहीं मानता, क्योंकि कई सालों तक बंगाल में कोई कानून-व्यवस्था थी ही नहीं। लेकिन अगर कानून का राज स्थापित हो जाए, तो सभी डरेंगे। समाज में न्याय लाना, सुधार करना, माहौल ठीक करना और इस तरह का काम करने पर क्या होगा, वह भी एक उदाहरण के तौर पर सामने रहे।
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