कोलकाता के एक विधि महाविद्यालय में पिछले सप्ताह हुए कथित सामूहिक बलात्कार के सिलसिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा गठित ‘तथ्यान्वेषी दल’ ने सोमवार को कहा कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के कोलकाता पुलिस आयुक्त के आश्वासन के बावजूद, वह पुलिस पर मामले की उचित जांच करने के लिए भरोसा नहीं कर सकता। सतपाल सिंह, मीनाक्षी लेखी, बिप्लब कुमार देब और मनन कुमार मिश्रा वाला दल सोमवार सुबह कोलकाता पहुंचा और शहर के पुलिस प्रमुख मनोज कुमार वर्मा तथा साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज के अधिकारियों से मुलाकात की। दल ने सवाल उठाया कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को कॉलेज का कर्मचारी क्यों नियुक्त किया गया।
क्या बोलीं मीनाक्षी लेखी?
दल का इशारा सामूहिक बलात्कार मामले के मुख्य आरोपियों में से एक, मोनोजीत मिश्रा की अस्थायी नियुक्ति की ओर था, जिसके यौन शोषण और हिंसा के आपराधिक इतिहास को पुलिस और कॉलेज अधिकारियों ने कथित तौर पर नजरअंदाज कर दिया। लेखी ने आरोपियों के लिए मृत्युदंड की वकालत करते हुए कहा, ‘‘अपराधियों को कॉलेज में बिना किसी उचित सत्यापन के तदर्थ शिक्षक या कर्मचारी के रूप में नियुक्त किया जाता है। मुख्य आरोपी की कोई हिस्ट्रीशीट नहीं है, जिस पर पहले ही मामला दर्ज किया जा चुका है और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) और शिक्षा मंत्रालय द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए पिछले दरवाजे से उसकी नियुक्ति की गई थी। यह शिक्षा का अपराधीकरण भी है।’’
मनन कुमार मिश्रा बोले- बंगाल की महिलाएं सुरक्षित नहीं
पिछले वर्ष कोलकाता के एक मेडिकल कॉलेज में एक डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या का जिक्र करते हुए तथ्यान्वेषी दल ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि ऐसे हर अपराध के पीछे सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों का हाथ पाया जाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बंगाल में महिलाएं देश में सबसे अधिक असुरक्षित हैं तथा उनके खिलाफ अत्याचार के मामलों में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराना कठिन है। मनन कुमार मिश्रा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल की महिलाएं यहां सुरक्षित नहीं हैं। उनके खिलाफ अत्याचार की एक के बाद एक घटनाएं हो रही हैं। यह शर्म की बात है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध की ऐसी घटनाएं ऐसे राज्य में होती हैं जहां की मुख्यमंत्री खुद एक महिला हैं।’’
पुलिस की सही मंशा पर संदेह
उन्होंने कहा, ‘‘हमने आज कोलकाता पुलिस आयुक्त से मुलाकात की और उन्होंने हमें मुख्य आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। लेकिन ऐसे राज्य में जहां बलात्कार पीड़िता के लिए पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराना मुश्किल हो जाता है, हम उनके आश्वासन पर भरोसा नहीं कर सकते।’’ पहले बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रह चुके मिश्रा ने इस बात पर भी संदेह जताया कि क्या पीड़िता और उसके परिवार पर तथ्यान्वेषी दल से नहीं मिलने के लिए ‘दबाव’ डाला गया था। उन्होंने कहा, ‘‘जहां एक ओर हमें इस खतरे की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस की सही मंशा पर संदेह है, वहीं हम यह भी समझने में विफल रहे कि क्या पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों पर कोई दबाव है और उन्हें सामने आने की अनुमति क्यों नहीं दी गई।’’
(इनपुट-भाषा)