नई दिल्ली: तीन साल पहले अक्तूबर 2012 में 14 साल की मलाला यूसुफ़ज़ई पर तालिबान के क़ातिलाना हमले की ख़बर पूरी दुनियां में आग की तरह फ़ैल गई थी।
स्कूल बस में जा रही मलाला पर स्वात प्रांत में तालिबानी आतंकियों ने सिर्फ इसलिए जानलेवा हमला किया था क्योंकि उसने न सिर्फ महिलाओं की पढ़ाई-लिखाई पर तालिबानी फ़रमान मानने से इंकार कर दिया था बल्कि इसके ख़िलाफ ऑनलाइन मुहिम भी छेड़ रखी थी।
गोली मलाला के सिर में लगी थी। उसे फौरन इंग्लैंड ले जाया गया जहां बड़ी मुश्किल से उसकी जान बची।